डीग: साहित्य और संस्कृति की त्रिवेणी जब बहती है, तो समाज का हर वर्ग उसमें डुबकी लगाने को आतुर हो उठता है। कुछ ऐसा ही नजारा शुक्रवार को डीग जिले के अऊ गांव में देखने को मिला, जहाँ अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जिला डीग के तत्वाधान में एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कड़कड़ाती ठंड के बीच शब्दों की गर्माहट ने ऐसा समां बांधा कि श्रोता देर तक अपनी जगह से हिल न सके। वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि हरीशचंद्र हरी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल साहित्य की अलख जगाई, बल्कि एक भावुक कर देने वाले जश्न का भी गवाह बना।

कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय संस्कृति के अनुरूप पूर्ण गरिमा और आध्यात्मिकता के साथ हुआ। राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बना चुके ओजस्वी कवि अभिषेक अमर ने जब माँ शारदे की वंदना प्रस्तुत की, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इसके पश्चात मंचासीन अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलन कर ज्ञान के प्रकाश का आह्वान किया। काव्य पाठ के सत्र में वीर, श्रृंगार और भक्ति रस की ऐसी धारा बही कि उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध हो गया। कवि चंद्रभान शर्मा 'चंचल', वरिष्ठ कवि सुरेन्द्र सार्थक और राजेंद्र गुर्जर ने अपनी एक से बढ़कर एक ओजस्वी और मर्मस्पर्शी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को कभी देशप्रेम के ज्वार में बहाया, तो कभी श्रृंगार की मिठास घोली। कवियों की हुंकार और संवेदनाओं ने वहां मौजूद हर शख्स को गदगद कर दिया, जिससे पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

यह गोष्ठी केवल कविताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें एक आत्मीय उत्सव का रंग भी घुला हुआ था। साहित्य परिषद के वरिष्ठ कवि और कोषाध्यक्ष चंद्रभान शर्मा 'चंचल' के 75वें जन्मदिन का विशेष अवसर इस कार्यक्रम को और भी खास बना गया। परिषद के पदाधिकारियों और साथी कवियों ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर और मिठाई खिलाकर जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें दीं। 75 वर्ष की आयु में भी साहित्य के प्रति उनका समर्पण देख वहां मौजूद युवा पीढ़ी प्रेरित हुए बिना न रह सकी।

इस साहित्यिक महाकुंभ में गांव और समाज के कई गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को चार चांद लगा दिए। प्रधानाचार्य अरविन्द कौशल और गांव के प्रशासक इंद्रपाल सिंह ने कवियों का उत्साहवर्धन किया। वहीं, शिवचरण बालोठिया, श्यामसुंदर शर्मा और हेमेंद्र शर्मा की मौजूदगी ने आयोजकों का मनोबल बढ़ाया। सबसे सुखद पहलू यह रहा कि इस कार्यक्रम में नारी शक्ति और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई, जो यह सिद्ध करता है कि ग्रामीण अंचलों में भी साहित्य के प्रति अनुराग आज भी जीवित है। देर शाम तक चले इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि शब्द केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का सबसे सशक्त माध्यम हैं।

Pooran Prakash Bansal, Deeg

Pooran Prakash Bansal, Deeg

नाम: पूरण प्रकाश बंसल

पद: पत्रकार (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य

परिचय 

पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।

पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)

पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:

  • दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।

  • राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।

  • प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।

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