डीग में जीवन ज्योति दीर्घ गौशाला का शुभारंभ, सुंदरकांड और भजन संध्या आज
डीग के कामां रोड पर महंत लक्ष्मण मंदिर की प्रेरणा से नवनिर्मित गौशाला का उद्घाटन, समाजसेवी निर्मल गोयल होंगे मुख्य अतिथि।
डीग 31 जनवरी गौ सेवा भारतीय संस्कृति और आस्था को दर्शाते हैं। इन्हीं शब्दों को चरितार्थ करते हुए डीग शहर के कामां रोड़ पर परम पूज्य पंडित मुरारी लाल पाराशर मंहत लक्ष्मण मंदिर की प्रेरणा से आचार्य पंडित गणेश दत्त पाराशर के सानिध्य में जीवन ज्योति दीर्घ गौशाला बृज लठावन धाम दीर्घपुर का शुभारंभ आज प्रातः 10 बजे होगा।
कार्यक्रम का विवरण एवं समय
- गौशाला उद्धघाटन में प्रातः 9 बजे सुन्दर काण्ड का पाठ, 12 बजे प्रसादी तथा भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जायेगा।
- शुभारंभ समय: आज प्रातः 10 बजे।
मुख्य अतिथि एवं आयोजक
कार्यक्रम संयोजक वैध नन्द किशोर गंधी ने जानकारी देते हुए बताया कि "कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाज सेवी निर्मल गोयल रहेंगे।"

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
