डीग: 14 साल बाद थाने से मुक्त होंगी मूर्तियां, कोर्ट ने दिया स्थापना का आदेश
जिला न्यायालय ने मध्यस्थता के जरिए मूर्तियों को बड़े लक्ष्मण मंदिर में प्रतिस्थापित करने का निर्देश दिया, प्रतिवादी पक्ष उठाएगा पूजा का खर्च।

डीग जिला एवं सेशन न्यायालय परिसर में ऐतिहासिक मध्यस्थता आदेश पारित होने के बाद अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और मंदिर पक्ष के लोगों की सामूहिक तस्वीर।
डीग जिला एवं सेशन न्यायाधीश हेमराज गौड़ ने विगत 14 वर्षों से पुलिस अभिरक्षा में रखी छोटे लक्ष्मण जी महाराज और देवी उर्मिला की मूर्तियों को बड़े लक्ष्मण मंदिर में पुनः स्थापित करने का ऐतिहासिक मध्यस्थता आदेश पारित किया है। न्यायालय के इस फैसले के बाद शहर में खुशी की लहर दौड़ गई।
विद्वान राजकीय अधिवक्ता राकेश खंडेलवाल ने बताया कि शहर के मुख्य बाजार स्थित मिडिल स्कूल की गली में बने छोटे लक्ष्मण मंदिर में विराजमान छोटे लक्ष्मण जी महाराज और देवी उर्मिला की दोनों मूर्तियां मंदिर की जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच हुए विवाद के बाद उप जिला मजिस्ट्रेट डीग के अंतरिम आदेशों के तहत थाना अधिकारी पुलिस थाना डीग को सुपुर्द कर दी गई थीं। तभी से दोनों मूर्तियां थाना अधिकारी डीग की अभिरक्षा में थाना परिसर के एक कमरे में रखी हुई थीं।
गत 14 वर्षों से दोनों मूर्तियों की पूजा-अर्चना नहीं हो पा रही थी। श्रद्धालु दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों से वंचित थे, जिससे आमजन में लगातार नाराजगी बनी हुई थी। मामले में मंदिर की जमीन संबंधी दीवानी वाद जिला एवं सेशन न्यायालय डीग में विचाराधीन है।
मामले की सुनवाई के दौरान जिला एवं सेशन न्यायाधीश हेमराज गौड़ ने पक्षकारों के अधिवक्ताओं को सुनने के बाद मध्यस्थता की कार्रवाई कराई। मध्यस्थता में पुलिस थाना अधिकारी डीग की रिसीवर सुपुर्दगी में रखी दोनों मूर्तियों को मुक्त कर शहर स्थित बड़े लक्ष्मण जी मंदिर में परंपरा अनुरूप पुनः प्रतिस्थापित कराने पर सहमति बनी।
इसके बाद न्यायालय ने मध्यस्थता आदेश पारित करते हुए छोटे लक्ष्मण जी महाराज और देवी उर्मिला जी की मूर्तियों की स्थापना बड़े लक्ष्मण जी महाराज मंदिर में शुभ मुहूर्त में शास्त्रोक्त विधि और परंपरा अनुसार कराने के निर्देश दिए। आदेश में कहा गया कि प्राण प्रतिष्ठा में होने वाला समस्त खर्च प्रतिवादी पक्ष वहन करेगा। इसके साथ ही प्रतिस्थापन के बाद राजभोग का पूरा व्यय भी प्रतिवादी पक्ष की ओर से वहन किया जाएगा।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिए कि प्रतिवादी पक्ष मूर्तियों के प्रतिस्थापन की तिथि से आगामी छह माह का राजभोग व्यय मध्यस्थ द्वारा नियुक्त व्यक्ति श्री गणेश दत्त शर्मा के पास जमा कराएगा। आदेश की पालना सुनिश्चित कराने के लिए थाना अधिकारी रामनरेश मीणा को निर्देशित किया गया है। वहीं मंदिर से संबंधित अन्य विवादित संपत्तियां पूर्ववत रिसीवर के अधिपत्य में ही रहेंगी।
मध्यस्थता के दौरान वादी पक्ष और उनके अधिवक्ता श्रीनाथ शर्मा, प्रतिवादी पक्ष और उनके अधिवक्ता प्रवीण चौधरी एवं नीरज वर्मा, राजकीय अधिवक्ता राकेश खंडेलवाल, थाना अधिकारी रामनरेश मीणा, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष आनंद पटेल, वर्तमान अध्यक्ष सुबोध पाराशर तथा लक्ष्मण मंदिर महंत गणेश दत्त शर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
मध्यस्थता आदेश की जानकारी मिलते ही न्यायालय परिसर में मिठाई वितरित की गई। बाजार में पटाखे फोड़े गए और लोगों ने जिला एवं सेशन न्यायाधीश हेमराज गौड़ के इस ऐतिहासिक फैसले की सराहना की। 14 वर्षों बाद श्रद्धालुओं के लिए छोटे लक्ष्मण जी महाराज और देवी उर्मिला के दर्शन एवं पूजा-अर्चना का मार्ग प्रशस्त होने से धार्मिक आस्था से जुड़े इस मामले का महत्वपूर्ण समाधान माना जा रहा है।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
