डीग। ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के अस्तित्व पर मंडराते संकट और इसके नामकरण को लेकर छिड़े विवाद ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। शनिवार को डीग जिले में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ तीखे तेवर अपनाए। जिला प्रभारी राजेश चौधरी ने दो टूक शब्दों में कहा कि मनरेगा महज एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के गरीबों का संवैधानिक अधिकार है, जिसे कमजोर करने का अर्थ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना है। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2005 में तत्कालीन यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया यह कानून प्रत्येक ग्रामीण को रोजगार की वैधानिक गारंटी देता है, लेकिन वर्तमान सत्ता इसे केवल एक साधारण योजना में तब्दील करने की कोशिश कर रही है। चौधरी ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिन के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया, तो बेरोजगारी भत्ता देना सरकार की कानूनी बाध्यता है, जो इसकी मौलिक विशेषता है।

प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मंत्री जाहिदा खांन ने आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा कि जहां एक ओर केंद्र का राजस्व जीएसटी और अन्य करों के माध्यम से बढ़कर 48 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, वहीं राजस्थान सरकार का राजस्व वित्तीय वर्ष 2025-26 में करीब 3 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। उन्होंने चिंता जताई कि केंद्र सरकार पर राजस्थान का मनरेगा मद में हजारों करोड़ रुपया बकाया है, जो सीधे तौर पर गरीबों के निवाले पर प्रहार है। जाहिदा खांन ने तर्क दिया कि भारत की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है और साल के 365 दिनों में से केवल 120 दिन ही कृषि कार्य उपलब्ध होता है। शेष 245 दिनों में मनरेगा ही वह सहारा है जो ग्रामीण मजदूरों को न केवल आजीविका प्रदान करता है, बल्कि देश की प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि और सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण में भी योगदान देता है। 100 दिन के रोजगार की गारंटी ग्रामीण आबादी के खाली समय का सदुपयोग सुनिश्चित करती थी, जिसे अब संकट में डाला जा रहा है।

आंदोलन की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी डीग के जिलाध्यक्ष राजीव चौधरी ने घोषणा की कि जनवरी से फरवरी तक 'मनरेगा बचाओ' राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत 11 जनवरी को महात्मा गांधी अथवा संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष एक दिवसीय उपवास रखा जाएगा। इसके पश्चात 12 से 29 जनवरी तक प्रत्येक ग्राम पंचायत में चौपालों का आयोजन कर जनता को जागरूक किया जाएगा। संघर्ष के अगले चरण में 31 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला कलेक्टर कार्यालय के समक्ष धरना प्रदर्शन होगा, जबकि 7 से 15 फरवरी तक विधानसभा और लोकभवन का घेराव किया जाएगा। आंदोलन का समापन 16 से 25 फरवरी के बीच आयोजित होने वाली विशाल रैलियों के साथ होगा। इस अवसर पर सुरेश पूंछरी, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी खोह अध्यक्ष भवानी शंकर शर्मा, जिला परिषद सदस्य मोहन सिंह अलीपुर, राज कुमार कठैरा, मिट्ठू सिंह सांखला, दिनेश मोनी, पूरन बडेसरा, विक्रम एडवोकेट और सोहन लाल भारती सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर मनरेगा के अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया।

Pooran Prakash Bansal, Deeg

Pooran Prakash Bansal, Deeg

नाम: पूरण प्रकाश बंसल

पद: पत्रकार (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य

परिचय 

पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।

पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)

पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:

  • दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।

  • राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।

  • प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।

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