डीग, 12 जनवरी। राजस्थान के डीग जिले में आज ग्रामीण आजीविका के सबसे बड़े आधार 'मनरेगा' को बचाने के लिए कांग्रेस ने एक निर्णायक अभियान का आगाज किया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर जिला कांग्रेस कमेटी डीग के अध्यक्ष राजीव सिंह के नेतृत्व में एक व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को कथित रूप से कमजोर करने और इसके नाम से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाने की साजिशों के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाना था। जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में आयोजित इन 'चौपालों' में ग्रामीणों और श्रमिकों का भारी हुजूम उमड़ा, जिससे यह विरोध प्रदर्शन एक जन आंदोलन के रूप में परिवर्तित होता नजर आया।

अभियान के दौरान ग्राम पंचायत बैलारा कलां के ग्राम नगला मांझी, सुरोता पंचायत और खेड़ा ब्रह्मांड के ग्राम कटहरा चौथ में विशेष सभाएं आयोजित की गईं। इन कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रधानों, रोजगार सेवकों और भारी संख्या में उपस्थित मनरेगा श्रमिकों को विस्तार से जानकारी दी। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा सरकार मनरेगा के बजट में कटौती कर और इसके स्वरूप को बदलकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ को तोड़ने का प्रयास कर रही है। नेताओं ने जोर देकर कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के सम्मान और आजीविका का अधिकार है, जिसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

इस महत्वपूर्ण जनसंपर्क आंदोलन में राष्ट्रीय और स्थानीय नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम में राजीव गांधी कांग्रेस नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव राजकुमार, डीग कच्ची बस्ती प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष राजेश कुमार चक मीणा, पर्यावरण प्रकोष्ठ के महामंत्री प्रेमसिंह प्रजापत और वरिष्ठ नेता रघुवीर सिंह रारह ने अपने संबोधन से कार्यकर्ताओं में जोश भरा। इनके साथ ही रामवीर सिंह, सिद्धू, अमित कुमार डीग, एम जुबेर, महबूद खान, कमल सिंह, विनोद कुमार कटहरा, और नंदकिशोर सिनसिनवार बैलारा जैसे वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी ग्राम स्तर पर संवाद स्थापित किया।

आंदोलन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए कमल सिंह, मंडल अध्यक्ष गजराज सिंह, आशीष राजपूत, दीपू वहज, बैलारा सरपंच ज्वाला प्रसाद, टिकेंद्र सिंह अवार, भोला अवार, गौरव यादव, जीतू यादव, बबलू बैलारा, चंद्रशेखर बोरई और हंडू सह सहित बड़ी संख्या में समर्पित कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में एक स्वर में यह संकल्प लिया गया कि यदि सरकार ने मनरेगा के मूल स्वरूप के साथ कोई भी छेड़छाड़ की, तो गांव-गांव से विरोध की आवाज बुलंद की जाएगी। यह आयोजन केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम मात्र नहीं था, बल्कि ग्रामीण स्वावलंबन को बचाने की दिशा में एक सशक्त लोकतांत्रिक प्रतिरोध का प्रतीक बनकर उभरा।

Pratahkal Newsroom

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