डीग, 03 सितम्बर। राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी हरियालो राजस्थान मिशन के तहत गुरुवार को ग्राम मांढेरा स्थित बोटेनिकल गार्डन में जिला प्रशासन एवं वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में विशेष वृक्षारोपण अभियान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रभारी सचिव डीग एवं संभागीय आयुक्त भरतपुर नलिनी कठोतिया तथा जिला कलक्टर मयंक मनीष ने विभिन्न प्रजातियों के फलदार, छायादार एवं औषधीय पौधों का रोपण किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया ने कहा कि वृक्षों और प्रकृति के साथ मानव का नाता सदियों पुराना है। उन्होंने कहा कि जिस तेजी से कंक्रीट के जंगल बढ़ते जा रहे हैं, उसे संतुलित करने के लिए व्यापक स्तर पर पौधरोपण के साथ उनका संरक्षण भी अनिवार्य है। उनके अनुसार वृक्षारोपण केवल पर्यावरण संवर्धन तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि आजीविका और रोजगार से भी जुड़ा है।

नलिनी कठोतिया ने आमजन से आम, आंवला तथा एक जिला-एक वनस्पति के तहत चयनित अर्जुन जैसी व्यावसायिक व औषधीय प्रजातियों के पौधे अधिक से अधिक संख्या में लगाने का आग्रह किया। उन्होंने राज्यव्यापी एक पेड़ माँ के नाम अभियान का उल्लेख करते हुए माताओं और परिवारों से बच्चों को पौधे रोपने तथा उनकी माँ की तरह सार-संभाल करने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया, ताकि हर पौधे का जीवन सुरक्षित हो सके। उन्होंने डीग जिले में पौधारोपण का लक्ष्य 100 प्रतिशत से अधिक अर्जित करने पर जिला कलक्टर मयंक मनीष तथा वन विभाग की टीम की मुक्तकंठ से सराहना की।

जिला कलक्टर मयंक मनीष ने आगामी नगरीय निकाय आम चुनाव-2026 के संदर्भ में पर्यावरण संरक्षण को नागरिक कर्तव्यों से जोड़ते हुए आमजन से एक पेड़ लोकतंत्र के नाम लगाने का आह्वान किया। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि जिस प्रकार पौधे रोपकर प्रकृति को समृद्ध किया जाता है, उसी प्रकार आगामी निकाय चुनावों में शत-प्रतिशत मतदान कर सशक्त लोकतंत्र के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने बोटेनिकल गार्डन में भव्य आयोजन और सघन हरियाली विकसित करने के प्रयासों के लिए वन विभाग का आभार व्यक्त किया।

उप वन संरक्षक सुरेश मिश्रा ने बताया कि अभियान की मुख्य विशेषता धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व की पंचवटी की विधिवत स्थापना रही। वास्तु एवं दिशा अनुकूलन के तहत पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण एवं अग्निकोण में पांच पवित्र वृक्ष—पीपल, बेलपत्र, बड़ (बरगद), आंवला एवं अशोक के पौधे रोपित किए गए। इनमें संभागीय आयुक्त नलिनी कठोतिया ने बेलपत्र का पौधा लगाया।

डीएफओ सुरेश मिश्रा ने बताया कि जिले में गुरुवार को विभिन्न विभागों के समन्वय से लगभग 1 लाख 25 हजार पौधे रोपने का महाभियान चलाया गया। वहीं, बोटेनिकल गार्डन में 500 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि कल श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व के उपलक्ष्य में पूंछरी का लौठा में यशोदा मैया के नाम से 200 विशेष पौधे रोपित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी, वन विभाग के कार्मिक, महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं एवं ग्रामीण मौजूद रहे। सभी ने उत्साहपूर्वक पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। डीग में आयोजित यह अभियान हरियालो राजस्थान मिशन के तहत पौधारोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखने वाला आयोजन रहा।

Pooran Prakash Bansal, Deeg

Pooran Prakash Bansal, Deeg

नाम: पूरण प्रकाश बंसल

पद: पत्रकार (प्रातः काल)

कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य

परिचय 

पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।

पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)

पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:

  • दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।

  • राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।

  • प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।

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