डीग: जनूथर अन्नपूर्णा रसोई में बदहाली, भुगतान न मिलने पर आंदोलन की चेतावनी
भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा ने जनूथर अन्नपूर्णा रसोई का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए और मानदेय भुगतान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

डीग जिले के जनूथर में अन्नपूर्णा रसोई के औचक निरीक्षण के बाद मानदेय न मिलने और अव्यवस्थाओं के विरोध में प्रदर्शन करते भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा के पदाधिकारी और कार्यरत महिलाएं।
डीग, 26 मई। राजस्थान के डीग जिले के जनूथर में संचालित अन्नपूर्णा रसोई में सरकारी दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रभान गुप्ता ने अपनी टीम के साथ जनूथर स्थित अन्नपूर्णा रसोई का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां पर स्वयं भोजन कर व्यवस्थाओं को परखा। निरीक्षण में जहां एक ओर सफाई व्यवस्था उत्तम पाई गई, वहीं दूसरी ओर सुविधाओं और संविदा कर्मियों के मानदेय को लेकर बेहद चौंकाने वाली बदहाली सामने आई है। इस औचक निरीक्षण के दौरान चंद्रभान गुप्ता के साथ मौके पर विवेक चौधरी, गोविन्द, परुषोत्तम जाटव, पुष्पेंद्र बंसल एवं घनश्याम सैनी आदि टीम के सदस्य प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
अन्नपूर्णा रसोई की जमीनी हकीकत खंगालने पर पता चला कि यहां सुविधाओं के नाम पर भारी ढांचागत विफलता पसरी हुई है। रसोई में भीषण गर्मी से राहत के लिए कूलर तो रखा हुआ है, लेकिन वह महज एक कबाड़ का शो-पीस बना खड़ा है। इसी प्रकार वहां लगा पंखा भी पूरी तरह बंद और शो-पीस साबित हो रहा है। इसके अतिरिक्त, तकनीकी व पेयजल व्यवस्था से जुड़े कंप्यूटर एवं वाटर कूलर भी लंबे समय से खराब पड़े हैं, जिससे यहां आने वाले लोगों और कार्यरत स्टाफ को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
निरीक्षण टीम ने जब इन अव्यवस्थाओं और व्यवस्था के संचालन को लेकर वहां कार्यरत महिलाओं से बातचीत करनी चाही, तो शुरुआत में उन्होंने डर के मारे कुछ भी कहने से साफ मना कर दिया। सभी कामकाजी महिलाएं अंदर से बेहद भयभीत नजर आईं। काफी मशक्कत और मान-मनौव्वल के बाद उन्होंने रोते-बिलखते अपना दर्द बयां किया। महिलाओं ने बताया कि उन्हें छह-छह महीने तक मजदूरी के पैसे नसीब नहीं होते हैं, जिसके कारण उन्हें स्थानीय राशन व अन्य दुकानदारों का तगादा झेलना पड़ता है। समय पर मानदेय न मिलने से उनके घर-परिवार में हमेशा ही गृह-क्लेश की आशंका बनी रहती है। वर्तमान स्थिति यह है कि पिछले करीब चार माह से उन्हें फूटी कौड़ी भी पगार के रूप में नहीं मिली है।
गौर करने वाली बात यह है कि कमरतोड़ महंगाई के इस दौर में जहां एक आम दैनिक मजदूरी 500 रुपये प्रतिदिन चल रही है, वहीं इस अन्नपूर्णा रसोई में दिन-रात सेवाएं देने वाली सहायिकाओं को मात्र चार से पांच हजार रुपये महीना ही मानदेय दिया जाता है। विडंबना यह है कि यह मामूली रकम भी उन्हें छह-छह महीने के लंबे अंतराल में दी जाती है। इस गंभीर मानवीय और प्रशासनिक लापरवाही को देखते हुए भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है।
मोर्चा ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि अगले 15 दिन के अंदर अन्नपूर्णा रसोई में खराब पड़े सभी उपकरणों को दुरुस्त नहीं कराया गया और महिलाओं की पिछले चार महीने से रुकी हुई मजदूरी का भुगतान नहीं दिलाया गया, तो 15 दिन के बाद उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसी कड़ी में प्रशासनिक हस्तक्षेप के लिए दिनांक 27 मई 2026 को तहसीलदार जनूथर को मुख्यमंत्री के नाम एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा जाएगा, ताकि इस अव्यवस्था और मानदेय संकट का स्थायी समाधान सुनिश्चित हो सके।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
