25 सितंबर की जगह अब 3 अक्टूबर को होगी भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा, डीग में बदली तारीख
डीग जिले में अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में होने वाली भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की तारीख बदल दी गई है। जिला कलेक्टर द्वारा अवकाश घोषित किए जाने के बाद अब परीक्षा 3 अक्टूबर को होगी।

डीग। अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज हरिद्वार के तत्वावधान में आयोजित होने वाली भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की डीग जिले में निर्धारित तिथि में बदलाव किया गया है। अब यह परीक्षा 25 सितंबर के स्थान पर 3 अक्टूबर को दोपहर 12:00 बजे से 1:00 बजे तक आयोजित की जाएगी।
भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के जिला संयोजक बृजेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि जिला कलेक्टर द्वारा 25 सितंबर को अवकाश घोषित किए जाने के कारण परीक्षा की तिथि में परिवर्तन किया गया है।
अब डीग जिले में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा 3 अक्टूबर को दोपहर 12:00 बजे से 1:00 बजे तक आयोजित होगी।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
