डीग में स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी हुंकार: जिला कलेक्टर ने फूँका 'स्पर्श कुष्ठ जागरूकता' का बिगुल, बोले—आमजन की सेवा ही प्राथमिकता
डीग जिला कलेक्टर उत्सव कौशल ने जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में चिकित्सा सेवाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु कड़े निर्देश दिए। बैठक में कुष्ठ रोग निवारण के लिए 'स्पर्श अभियान' और बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन पर जोर दिया गया, साथ ही 27 बच्चों की सफल सर्जरी पर टीम की सराहना की गई। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और जन-जागरूकता की दिशा में डीग प्रशासन का यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

डीग। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को नया आयाम देने और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए मंगलवार को डीग के पंचायत समिति सभागार में एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। जिला कलेक्टर उत्सव कौशल की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की इस बैठक ने न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता को दर्शाया, बल्कि जिले के उज्ज्वल स्वास्थ्य भविष्य की एक स्पष्ट रूपरेखा भी तैयार की। बैठक का आगाज करते हुए जिला कलेक्टर ने चिकित्सा अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देशित किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पूरी संवेदनशीलता के साथ पहुंचना चाहिए।
बैठक के दौरान एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में जिला कलेक्टर उत्सव कौशल ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 'कुष्ठ रोग पहचान पोस्टर' का विमोचन किया। इस पोस्टर के माध्यम से एक सशक्त संदेश प्रसारित किया गया कि त्वचा पर दाग, सुन्नपन या तंत्रिकाओं में सूजन जैसे लक्षणों को मामूली मानकर नजरअंदाज न करें, क्योंकि आधुनिक चिकित्सा और बहु-औषधि पद्धति (MDT) से इसका शत-प्रतिशत उपचार संभव है। इस जागरूकता की मशाल को ग्रामीण अंचल तक ले जाने के उद्देश्य से आगामी 30 जनवरी 2026 से 13 फरवरी 2026 तक पूरे जिले में 'स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान' चलाने का शंखनाद किया गया।
प्रशासनिक मुस्तैदी केवल बीमारी के इलाज तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि जिला स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में जिला कलेक्टर ने बायो-मेडिकल वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अस्पतालों से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर परिषद को आपसी समन्वय के साथ सख्त निगरानी करने के निर्देश दिए। वहीं, विभाग द्वारा 27 मासूम बच्चों की सफल सर्जरी कराए जाने की उपलब्धि पर कलेक्टर ने संतोष जताते हुए पूरी टीम की पीठ थपथपाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि दवाओं की उपलब्धता में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और एएनसी पंजीकरण के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की शत-प्रतिशत ट्रैकिंग सुनिश्चित की जाए।
बैठक के अंत में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. विजय सिंघल ने जिले में मौसमी बीमारियों की वर्तमान स्थिति का ब्यौरा पेश किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि वर्तमान में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और विभाग हर चुनौती से निपटने के लिए सतर्क है। इस रणनीतिक चर्चा में सीएमएचओ डॉ. विजय सिंघल के साथ उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बीसीएमओ, विभिन्न सीएचसी इंचार्ज, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, नगर परिषद और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों सहित एनजीओ प्रतिनिधियों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई, जो जिले के समग्र स्वास्थ्य सुधार के संकल्प को और मजबूती प्रदान करता है।

Pooran Prakash Bansal, Deeg
नाम: पूरण प्रकाश बंसल
पद: पत्रकार (प्रातः काल)
कार्यक्षेत्र: डीग जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): जिला समाचार, क्राइम (अपराध), प्रशासन, और स्वास्थ्य
परिचय
पूरण प्रकाश बंसल राजस्थान के डीग जिले के एक अत्यंत अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातः काल' समाचार पत्र में एक पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पूरण जी डीग जिले और उसके आसपास के क्षेत्रों से जिला स्तरीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, स्वास्थ्य व्यवस्था और आपराधिक मामलों (क्राइम) की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं। क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाना और खबरों को पूरी प्रामाणिकता के साथ पेश करना उनकी पत्रकारिता की पहचान है।
पत्रकारिता का लंबा अनुभव (Work Experience)
पूरण प्रकाश बंसल जी को मीडिया इंडस्ट्री में दो दशकों से भी अधिक (साल 2004 से) का एक व्यापक और समृद्ध अनुभव है। अपने इस लंबे सफर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े समाचार पत्रों के साथ काम किया है:
- दैनिक जागरण: पत्रकारिता क्षेत्र में लंबा और जमीनी अनुभव।
- राजदूत: वरिष्ठ स्तर पर समाचार कवरेज का अनुभव।
- प्रातः काल: साल 2022 से लगातार 'प्रातः काल' के साथ जुड़कर डीग जिले की कमान संभाल रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (10वीं पास) पूरी की है। साल 2004 से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण डीग जिले की भौगोलिक, सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर उनका जमीनी अनुभव किसी भी बड़ी डिग्री से कहीं अधिक मजबूत है।
