दौसा। सरकारी फाइलों में योजनाएं सुनहरे भविष्य का सपना दिखाती हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अक्सर प्रचार-प्रसार की कमी और प्रशासनिक शिथिलता की भेंट चढ़ जाती है। दौसा जिले में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'डिजिटल क्रॉप सर्वे गिरदावरी' और 'एग्रीस्टेक फार्मर रजिस्ट्री' का भविष्य भी फिलहाल कुछ ऐसे ही दोराहे पर खड़ा नजर आ रहा है। एक तरफ जहां जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार इस अभियान को मिशन मोड पर पूरा करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रचार-प्रसार की बेरुखी और जमीनी स्तर पर धीमी गति इस मिशन के लक्ष्यों के आड़े आ रही है। शुक्रवार को जिला कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर सख्त लहजे में स्पष्ट कर दिया कि अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं है।

राजस्व कार्यों की समीक्षा के दौरान जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने उपखंड अधिकारियों और तहसीलदारों को आड़े हाथों लेते हुए निर्देश दिए कि एग्रीस्टेक फार्मर रजिस्ट्री और डिजिटल गिरदावरी में अपेक्षित प्रगति लाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि 1 जनवरी से शुरू हुए इस डिजिटल अभियान में किसानों की भागीदारी तब तक सुनिश्चित नहीं होगी, जब तक उन्हें जागरूक नहीं किया जाएगा। कलेक्टर की मंशा साफ है कि किसान स्वयं ऐप डाउनलोड कर अपनी गिरदावरी दर्ज करें, लेकिन विडंबना यह है कि गांवों में इस आधुनिक व्यवस्था को लेकर वैसी हलचल नहीं दिख रही जैसी होनी चाहिए थी। बैठक में कलेक्टर ने 'सेव एज ड्राफ्ट' और 'अप्रूवल पेंडेंसी' जैसे तकनीकी अटकावों को तुरंत दूर करने और 'अनक्लेम्ड बाकेट्स' खातेदारों के पंजीकरण में तेजी लाने के कड़े आदेश दिए।

तकनीकी बाधाओं पर चर्चा करते हुए कलेक्टर ने एक व्यावहारिक समाधान भी पेश किया। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन गांवों में डिजिटल गिरदावरी के दौरान लोकेशन संबंधी समस्याएं आ रही हैं, वहां समय बर्बाद करने के बजाय 'अनेबल टू सर्वे' विकल्प का चयन कर कार्य को गति दी जाए। फील्ड में तैनात पटवारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे त्वरित गति से विजिट करें, जबकि तहसीलदारों को इस पूरी प्रक्रिया की सतत मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कलेक्टर ने साफ किया कि लघु सिंचाई गणना, ऑनलाइन सीमाज्ञान प्रकरण, सहमति विभाजन और नामान्तरण जैसे लंबित मामलों का निस्तारण भी उनकी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है।

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान दौसा उपखंड अधिकारी एवं लैंड रिकॉर्ड प्रभारी संजू मीणा सहित जिले के अन्य आला अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन की इस सक्रियता का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसान कल्याण की ये योजनाएं केवल फाइलों तक सीमित न रहें। डिजिटल गिरदावरी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आने वाले दिनों में तहसील स्तर पर कितनी गंभीरता दिखाई जाती है। यदि प्रचार-प्रसार की बेरुखी खत्म होती है और तकनीक के साथ तालमेल बैठता है, तो निश्चित रूप से दौसा जिला राजस्व डिजिटलीकरण के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगा, अन्यथा लक्ष्यों की पूर्ति महज एक चुनौती बनी रहेगी।

Sunil Satyawadi, Dausa

Sunil Satyawadi, Dausa

नाम: सुनील सत्यवादी

वर्तमान पद: संवाददाता / रिपोर्टर, पब्लिक ऐप (InShorts)

कार्यक्षेत्र: दौसा (राजस्थान)

अनुभव: साल 2006 से (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, और स्वास्थ्य

परिचय व अनुभव 

सुनील सत्यवादी साल 2006 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान प्रिंट मीडिया में प्रतिष्ठित पाक्षिक पत्रिका 'तथ्य भारती', 'राजस्थान पत्रिका' और 'दैनिक भास्कर' के लिए वर्षों तक लेख (आर्टिकल्स) लिखे। इसके बाद उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया में कदम रखते हुए 'सहारा समय', 'A1 टीवी' और 'ख़बर फ़ास्ट' सहित अनेक टीवी चैनलों के लिए काम किया। वर्तमान में वह अक्टूबर 2020 से वीडियो न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'पब्लिक ऐप' के लिए दौसा जिला मुख्यालय पर रिपोर्टर के रूप में कार्य कर रहे हैं।

विशेषज्ञता और कार्यशैली (Specialization & Skills)

  • त्वरित रिपोर्टिंग: मजबूत शब्दकोश के कारण वे किसी भी विषय पर बिना पूर्व स्क्रिप्ट या इंट्रो के सीधे कैमरे के सामने या मंच पर रिपोर्टिंग करने में सक्षम हैं।
  • लॉन्ग-फॉर्म इंटरव्यू: पिछले 5 वर्षों में उन्होंने जिला कलेक्टर सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारियों के कई विस्तृत और मोटिवेशनल इंटरव्यू लिए हैं।
  • सकारात्मक पत्रकारिता: वे मुख्य रूप से राजनीतिक और प्रशासनिक विषयों पर विश्लेषणात्मक व सकारात्मक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

स्नातक (Graduate)

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