दौसा में ‘रन फॉर वंदे मातरम’ मैराथन: 150 वर्ष पूरे होने पर देशभक्ति की अनोखी झलक
दौसा में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर जिला प्रशासन ने ‘रन फॉर वंदे मातरम’ मैराथन आयोजित की। प्रशासनिक अधिकारी, छात्र-छात्राएं और आम नागरिक देशभक्ति की भावना के साथ दौड़े। कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने गीत के ऐतिहासिक महत्व और स्वतंत्रता संग्राम में इसके योगदान को याद किया।

दौसा। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दौसा जिला प्रशासन ने शनिवार को एक भव्य और देशभक्ति से ओतप्रोत पहल की। जिले के कलेक्ट्रेट परिसर से लेकर पंडित नवल किशोर शर्मा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय तक आयोजित ‘रन फॉर वंदे मातरम’ मैराथन दौड़ ने जिलेवासियों को एकता, समर्पण और राष्ट्रीय गर्व की भावना से जोड़ दिया। इस अवसर पर प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस कर्मी, छात्र-छात्राएं और विभिन्न सामाजिक संगठन बड़े उत्साह के साथ शामिल हुए।
सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में कार्यक्रम की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ के सामूहिक गायन के साथ हुई। चारों ओर राष्ट्रगीत की गूंज ने वातावरण को देशभक्ति की ऊर्जा से भर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को भारत की एकता, अखंडता और देशभक्ति की शपथ दिलाई गई। इसके बाद जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने हरी झंडी दिखाकर दौड़ को रवाना किया। “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा।
मैथ्रॉन दौड़ का मार्ग कलेक्ट्रेट परिसर से शुरू होकर सोमनाथ सर्कल और आगरा रोड होते हुए राजकीय पीजी कॉलेज तक निर्धारित किया गया था। रास्ते में लोग प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते नजर आए। पीजी कॉलेज पहुँचने पर दौड़ का समापन हुआ और सभी प्रतिभागियों का अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है। उन्होंने बताया कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने इसे अपने प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में लिखा था। उस समय बंगाल में सन्यासी आंदोलन चल रहा था और यह गीत भारत माता को समर्पित था। कलेक्टर ने कहा, “इस गीत के गूंजते ही लोग एकजुट होकर स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते थे। यही कारण था कि अंग्रेजों ने इस गीत पर प्रतिबंध भी लगा दिया था। आज, 150 वर्षों के बाद यह गीत हमारे पूर्वजों और स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष का प्रतीक है।”
शाम को पीजी कॉलेज परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति गीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से ‘वंदे मातरम’ के संदेश को जीवंत किया। कार्यक्रम में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय और स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानियों को श्रद्धांजलि दी गई।
मैराथन दौड़ में छात्र-छात्राएं तिरंगा लेकर दौड़ते दिखे, और प्रतिभागियों ने “भारत माता की जय” के नारों से वातावरण को गूंजा दिया। यह आयोजन न केवल देशभक्ति और एकता का संदेश देने वाला रहा, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासन और आम नागरिक मिलकर किसी भी पहल को सफल बनाने में सक्षम हैं। दौसा में आज हर कोने में ‘वंदे मातरम’ की गूंज सुनाई दी और 150 वर्षों की इस ऐतिहासिक यात्रा को याद करते हुए सभी ने भारत माता को नमन किया।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
