दौसा। कभी अपने विशाल जनाधार और समारोहों में भारी भीड़ जुटाने के लिए प्रसिद्ध कांग्रेस पार्टी आज अपने ही कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं की कमी से जूझती नजर आ रही है। सोमवार को चौधरी धर्मशाला में आयोजित आयरन लेडी, भारत की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी की 108वीं जयंती के अवसर पर कांग्रेस ने कार्यक्रम रखा, लेकिन इसमें केवल 26 लोग ही शामिल हुए। इस संख्या में भी कांग्रेस विधायक दीनदयाल बैरवा और उनके कुछ कार्यकर्ताओं की उपस्थिति शामिल थी।

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के प्रभाव को भी दर्शाती है, जो अब राजस्थान समेत पूरे देश में दिखने लगा है। दौसा जिला कांग्रेस के 55 वार्डों के पूर्व दावेदार, नगर अध्यक्ष, ब्लॉक व शहर स्तर के पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहते हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश ने जयंती समारोह में भाग नहीं लिया।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह है कि कांग्रेस के भीतर कटुता, नाराजगी और गुटबाजी अब चरम पर है। पार्टी के बड़े नेताओं और पदाधिकारियों की दूरी ने भी इस खालीपन को और स्पष्ट कर दिया है। कार्यक्रम में इतनी कम उपस्थिति यह संकेत देती है कि संगठन की जड़ें अंदर से कमजोर हो रही हैं।

दौसा के राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि सबसे बड़ी पार्टी मानी जाने वाली कांग्रेस अब अपने ही कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने में असफल हो रही है, तो आगामी चुनावों में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। कांग्रेस के लिए यह नजारा चेतावनी जैसा है कि संगठनात्मक ढांचा और कार्यकर्ताओं का मनोबल दोनों पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

दौसा में कांग्रेस के हाथों में न केवल भीड़ की कमी है, बल्कि पार्टी की सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह स्थिति जिला अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल नेताओं के दावों और संगठनात्मक ताकत की वास्तविकता पर भी संदेह पैदा कर रही है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story