अब सीधे जिला कलेक्टर का आएगा फोन: जन समस्याओं के समाधान की हकीकत परखने के लिए देवेंद्र कुमार ने शुरू की अनूठी पहल, हर महीने खुद करेंगे संवाद
जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने जन समस्याओं के समाधान की वास्तविकता परखने के लिए एक संवेदनशील पहल शुरू की है। अब वे हर महीने 181 पोर्टल और अन्य माध्यमों से शिकायत करने वाले 20 पीड़ितों को स्वयं फोन कर फीडबैक लेंगे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के मॉडल पर आधारित इस कदम का उद्देश्य झूठे निस्तारण पर रोक लगाना और आमजन को वास्तविक राहत पहुंचाना है।

अक्सर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और शिकायतों के अंबार के बीच आम आदमी की आवाज फाइलों में दबकर रह जाती है, लेकिन अब प्रशासन ने इस परिपाटी को बदलने और जवाबदेही तय करने के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि अपनी समस्या दर्ज कराने के बाद आपको सीधे जिला कलेक्टर का फोन आए और वे पूछें कि "क्या आपका काम हुआ या नहीं?" यह अब मात्र कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत बनने जा रही है। जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने जन समस्याओं के त्वरित और वास्तविक निस्तारण को सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की है, जिसके तहत प्रशासन अब बंद कमरों से बाहर निकलकर सीधे पीड़ितों से संवाद स्थापित करेगा।
'प्रात:काल' के संवाददाता सुनील सत्यवादी के साथ हुई एक विशेष वार्ता के दौरान जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने इस संवेदनशील और पारदर्शी पहल का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक कार्यशैली में बदलाव लाते हुए अब जिला प्रशासन की ओर से हर महीने औचक रूप से 40 ऐसे पीड़ितों को फोन किया जाएगा, जिन्होंने अपनी समस्याएं दर्ज कराई थीं। इस पहल का सबसे अहम और संवेदनशील पहलू यह है कि इन 40 कॉल्स में से 20 फोन खुद जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार करेंगे। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत को परखना है। कलेक्टर सीधे परिवादी से बात कर यह फीडबैक लेंगे कि संबंधित विभाग द्वारा उनकी समस्या का समाधान किया गया है या नहीं, और यदि समाधान के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है, तो उस पर तत्काल कड़ा एक्शन लेते हुए राहत पहुंचाई जाएगी।
इस नवाचार के पीछे की मंशा को स्पष्ट करते हुए जिला कलेक्टर ने राज्य सरकार की संवेदनशीलता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह पहल सीधे तौर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की कार्यशैली से प्रेरित है। जिस प्रकार मुख्यमंत्री स्वयं प्रायः आमजन को फोन कर उनकी समस्याओं और प्रशासनिक कामकाज का फीडबैक लेते हैं, ठीक उसी 'जन-संवाद मॉडल' को अब जिला स्तर पर भी सख्ती से लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को कम करना और सुशासन के वादे को धरातल पर उतारना है। कलेक्टर ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि राज्य सरकार जन समस्याओं के प्रति बेहद गंभीर है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला कलेक्टर ने अपनी बात को विस्तार देते हुए उस तकनीकी और व्यवहारिक समस्या का भी जिक्र किया, जिससे आम जनता अक्सर जूझती है। उन्होंने बताया कि प्रायः देखा गया है कि जब लोग 181 हेल्पलाइन या अन्य पोर्टल्स पर अपनी शिकायत दर्ज कराते हैं, तो कई बार बिना वास्तविक समाधान के ही शिकायत को 'निस्तारित' (Resolved) दिखाकर पोर्टल पर एंट्री बंद कर दी जाती है। पीड़ित भटकता रहता है और सिस्टम में उसकी शिकायत सुलझ चुकी होती है। जिला प्रशासन द्वारा किए जाने वाले ये फोन कॉल्स इसी 'फर्जी निस्तारण' की पोल खोलेंगे। इन कॉल्स के माध्यम से उन तथ्यों की सत्यता जांची जाएगी कि क्या वाकई पीड़ित को राहत मिली है या उसे केवल आंकड़ों में उलझाया गया है। जिला कलेक्टर का यह कदम न केवल अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगा, बल्कि पीड़ित के चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान भी लाएगा, जो कि एक संवेदनशील सरकार का सर्वोपरि उद्देश्य है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
