दौसा। कुछ ही दिन पहले नगर परिषद द्वारा पारित बजट के बाद कांग्रेस और भाजपा के पार्षदों के बीच दिखी एकजुटता इस बार की बैठक में टूटती नजर आई। नगर परिषद की ताज़ा बैठक में बजट की सहमति के बावजूद दोनों दलों के पार्षद एक-दूसरे के आमने-सामने बहस करते दिखे और राजनीतिक तनाव हावी रहा।

बैठक के दौरान कई पार्षदों ने सभापति के फैसलों पर सवाल उठाए, तो कुछ कांग्रेस पार्षदों ने भाजपा के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। वहीं भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पार्षद अनावश्यक मुद्दों पर लंबी बहस कर रहे हैं। इस दौरान कई बार स्थिति इतनी गरम हो गई कि दोनों दलों के प्रतिनिधि एक-दूसरे के बिल्कुल सामने खड़े होकर तकरार में उतर गए।

राजनीतिक बहस और आरोप-प्रत्यारोप का यह दृश्य आगामी नगर निकाय चुनावों की प्रारंभिक जंग जैसा प्रतीत हुआ। बैठक भर जोरदार बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा, लेकिन लगातार हो रही नोकझोंक और हंगामे के चलते शहर के विकास कार्यों पर कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया जा सका।

पार्षदों के बीच तालमेल की कमी और राजनीतिक खींचतान के कारण कई अहम विकास परियोजनाएं अधर में रह गईं। यह बैठक इस बात का संकेत देती है कि आगामी निकाय चुनावों से पहले नगर परिषद की राजनीति और अधिक गरमा सकती है और विकास से जुड़े मुद्दों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

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