राज्य सरकार द्वारा आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर केवल जनसमस्याओं के समाधान का मंच ही नहीं बन रहे, बल्कि सामाजिक सौहार्द, पारिवारिक समन्वय और आपसी विश्वास को भी नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं। दौसा जिले के उपखंड सैंथल की ग्राम पंचायत सिण्डोली में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में वर्षों से लंबित भूमि विभाजन विवाद का समाधान आपसी सहमति से होने पर ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण देखने को मिला।

ग्राम सिण्डोली के अनेक खातेदारों के बीच भूमि विभाजन को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। स्पष्ट बंटवारे के अभाव में संबंधित खातेदारों को विभिन्न राजस्व कार्यों में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। यह विवाद न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर रहा था, बल्कि परिवारों के बीच भी असहमति का कारण बना हुआ था।

ग्रामीण सेवा शिविर के दौरान राजस्व विभाग की टीम ने सभी पक्षों को एक साथ बैठाकर उनकी समस्याओं को सुना और समझाइश के माध्यम से सहमति बनाने का प्रयास किया। अधिकारियों की पहल रंग लाई और सभी खातेदार भूमि विभाजन के लिए एकमत हो गए। विवाद के समाधान के बाद हल्का पटवारी सिण्डोली एवं भू-अभिलेख निरीक्षक ने तत्काल विभाजन प्रस्ताव तैयार कर तहसीलदार कुण्डल के समक्ष प्रस्तुत किया।

तहसीलदार ने प्रस्ताव को तत्काल स्वीकृति प्रदान करते हुए ऑनलाइन प्रक्रिया पूर्ण कराई। इसके बाद सभी खातेदारों को नवीन तरमीमशुदा जमाबंदी जारी कर दी गई। उल्लेखनीय है कि वर्षों से लंबित भूमि विभाजन का पूरा कार्य एक ही दिन में संपन्न हो गया, जिससे संबंधित परिवारों में खुशी और संतोष का माहौल देखने को मिला।

इस भूमि विवाद में गोबिन्द पुत्र बीन्या, सुगनसिंह, मोतीलाल, राधा देवी पत्नी सुरजन, अशोक कुमार पुत्र गिर्राज प्रसाद, छोटी देवी पत्नी गिर्राज प्रसाद, मोहन, रामबाबू, रिंकू पुत्र गिर्राज प्रसाद, बनवारी, रामा, राहुल, लक्ष्मण तथा संतोष देवी पत्नी लक्ष्मण सहित कई खातेदार शामिल थे।

लाभार्थियों ने बताया कि जिस समस्या के समाधान के लिए उन्हें लंबे समय से प्रतीक्षा करनी पड़ रही थी, उसका निस्तारण ग्रामीण सेवा शिविर में सरल, पारदर्शी और त्वरित प्रक्रिया के माध्यम से संभव हो सका। उन्होंने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर आयोजित ऐसे शिविर ग्रामीणों को तत्काल राहत प्रदान करने के साथ प्रशासनिक सेवाओं को सीधे आमजन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

ग्रामीण सेवा शिविर में भूमि विवाद के समाधान की यह पहल न केवल प्रशासनिक दक्षता का उदाहरण बनी, बल्कि यह भी साबित कर गई कि संवाद, सहमति और संवेदनशील प्रशासनिक हस्तक्षेप से वर्षों पुराने विवादों का भी स्थायी समाधान संभव है।

Pratahkal Bureau

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