दौसा शहर शनिवार को उस समय राजनीतिक और सामाजिक हलचलों का केंद्र बन गया, जब यूजीसी की नई गाइडलाइंस के विरोध में ‘यूजीसी रोलबैक’ के समर्थन में निकली रैली देखते ही देखते विशाल जनसैलाब में बदल गई। सुबह सहज नाथ महादेव मंदिर से शांतिपूर्वक शुरू हुई यह रैली जैसे-जैसे शहर की सड़कों से आगे बढ़ी, उसका स्वरूप व्यापक होता गया और गांधी तिराहे तक पहुंचते-पहुंचते यह शक्ति प्रदर्शन में तब्दील हो गई।


रैली लालसोट रोड और आगरा रोड से होते हुए गांधी तिराहे पहुंची, जहां “यूजीसी रोलबैक”, “समाज को मत बांटो” और “समाज की एकता कायम रहे” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। बड़ी संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की। इसी दौरान कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा भारतीय जनता पार्टी का झंडा जलाने की घटना भी सामने आई, जिससे माहौल कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गया।




कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया, जब युवाओं ने बैरिकेड्स हटाने का प्रयास किया और हाईवे की ओर बढ़ने की कोशिश की। हालांकि पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए स्थिति को नियंत्रित किया और संभावित जाम की स्थिति को टाल दिया। प्रशासन की ओर से एसडीएम संजू मीणा को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें यूजीसी की नई गाइडलाइंस को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की गई।


रैली में करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराणा ने जनसमूह को संबोधित करते हुए 8 मार्च को दिल्ली कूच का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज अब संगठित है और अपने बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उल्लेख करते हुए उन्होंने समाज की एकजुटता पर जोर दिया और चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।


इस आयोजन की विशेषता यह रही कि यह किसी एक व्यक्ति के नेतृत्व में नहीं, बल्कि विभिन्न सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं की सामूहिक भागीदारी से आयोजित हुआ। युवाओं के साथ-साथ 45 से 65 वर्ष आयु वर्ग के लोगों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। महिलाओं की अपेक्षाकृत कम भागीदारी के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का जुटना जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है।


रैली के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं को भीड़ के बीच अपनी उपस्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। आयोजन से जुड़े लोगों ने इसे दौसा में इस प्रकार की पहली ऐतिहासिक और व्यापक रैली बताया। प्रदर्शन के बाद जिले में राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया है। जानकारों का मानना है कि इस भीड़ को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिशें भी तेज हो सकती हैं।


दौसा की सड़कों पर उमड़ा यह जनसैलाब केवल एक विरोध प्रदर्शन भर नहीं था, बल्कि सामाजिक एकजुटता और भविष्य की रणनीति का संकेत भी देता नजर आया। अब सबकी निगाहें 8 मार्च को प्रस्तावित दिल्ली कूच पर टिकी हैं, जो इस आंदोलन की दिशा और प्रभाव को तय करेगा।

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Sunil Satyawadi, Dausa

Sunil Satyawadi, Dausa

नाम: सुनील सत्यवादी

वर्तमान पद: संवाददाता / रिपोर्टर, पब्लिक ऐप (InShorts)

कार्यक्षेत्र: दौसा (राजस्थान)

अनुभव: साल 2006 से (प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, और स्वास्थ्य

परिचय व अनुभव 

सुनील सत्यवादी साल 2006 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने अपने करियर के दौरान प्रिंट मीडिया में प्रतिष्ठित पाक्षिक पत्रिका 'तथ्य भारती', 'राजस्थान पत्रिका' और 'दैनिक भास्कर' के लिए वर्षों तक लेख (आर्टिकल्स) लिखे। इसके बाद उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया में कदम रखते हुए 'सहारा समय', 'A1 टीवी' और 'ख़बर फ़ास्ट' सहित अनेक टीवी चैनलों के लिए काम किया। वर्तमान में वह अक्टूबर 2020 से वीडियो न्यूज़ प्लेटफॉर्म 'पब्लिक ऐप' के लिए दौसा जिला मुख्यालय पर रिपोर्टर के रूप में कार्य कर रहे हैं।

विशेषज्ञता और कार्यशैली (Specialization & Skills)

  • त्वरित रिपोर्टिंग: मजबूत शब्दकोश के कारण वे किसी भी विषय पर बिना पूर्व स्क्रिप्ट या इंट्रो के सीधे कैमरे के सामने या मंच पर रिपोर्टिंग करने में सक्षम हैं।
  • लॉन्ग-फॉर्म इंटरव्यू: पिछले 5 वर्षों में उन्होंने जिला कलेक्टर सहित अनेक प्रशासनिक अधिकारियों के कई विस्तृत और मोटिवेशनल इंटरव्यू लिए हैं।
  • सकारात्मक पत्रकारिता: वे मुख्य रूप से राजनीतिक और प्रशासनिक विषयों पर विश्लेषणात्मक व सकारात्मक रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

स्नातक (Graduate)

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