दौसा। जिला अस्पताल एक बार फिर अपनी अव्यवस्थाओं और आरोपों की वजह से सुर्खियों में है। लेबर रूम में कथित चौथ वसूली का मामला सामने आया है, जहां प्रसूता के परिजनों से बख्शीश के नाम पर जबरन पैसा मांगने और विरोध करने पर मारपीट व मोबाइल छीने जाने का गंभीर आरोप लगा है। घटना ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवालों की बौछार खड़ी कर दी है।

गणेशपुर निवासी निरमा सैनी की रविवार रात जिला अस्पताल के लेबर रूम में डिलीवरी हुई, जिसमें बच्ची जन्मी। परिवार का आरोप है कि डिलीवरी के बाद स्टाफ ने प्रसूता को वार्ड में शिफ्ट करते समय ₹1100 की बख्शीश की मांग की। परिजनों ने पैसे देने से मना किया तो विवाद बढ़ गया। आरोप है कि स्टाफ ने परिजनों से धक्का-मुक्की की और घटना का वीडियो बनाने की कोशिश कर रहे एक परिजन का मोबाइल छीन लिया। विवाद के बीच स्टाफ मौके से निकल गया, जबकि प्रसूता को वहीं छोड़ दिया गया।

घटना के बाद पीड़ित परिवार ने नज़दीकी पुलिस चौकी में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में चौथ वसूली, मारपीट और मोबाइल छीने जाने के आरोप शामिल हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

जिला अस्पताल में लेबर रूम में नवजात के जन्म पर बख्शीश के नाम पर पैसों की मांग कोई नई बात नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी। मंत्री और जनप्रतिनिधि तक आवाज पहुंचने के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।

ताजा घटना ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन इस बार सख्त कदम उठाएगा या फिर मामला पहले की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

Pratahkal Bureau

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