नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 10 वर्ष का कठोर कारावास, डीएनए रिपोर्ट ने सिद्ध किया अपराध — न्यायालय ने सुनाई सजा, पीड़िता को मिलेगा मुआवजा
दौसा की पोक्सो न्यायालय ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी मोहम्मद सोहान सलमानी उर्फ शोएब को 10 वर्ष का कठोर कारावास और एक लाख रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। डीएनए रिपोर्ट से आरोप सिद्ध हुआ। पीड़िता को कुल चार लाख रुपए क्षतिपूर्ति और प्रतिकर राशि देने के आदेश जारी किए गए।

दौसा। विशिष्ट न्यायालय (पोक्सो एक्ट) दौसा ने शुक्रवार को नाबालिग से दुष्कर्म के एक सनसनीखेज मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। न्यायालय ने अर्थदंड की पूरी राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में देने और साथ ही तीन लाख रुपए अतिरिक्त पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत प्रदान करने के आदेश भी पारित किए।
मामला वर्ष 2018 का है, जब पीड़िता के पिता ने 17 जुलाई को थाना महवा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उसकी नाबालिग पुत्री अपने मामा के घर गई थी, जहां से आरोपी मोहम्मद सोहान सलमानी उर्फ शोएब पुत्र इमरान, निवासी मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश), उसे बहला-फुसलाकर ले गया। पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए एफआईआर संख्या 316/18 दर्ज की और आरोपी के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 376(2)(एन) तथा पोक्सो एक्ट की धाराओं 5/6, 16/17 के तहत चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया।
मामले की सुनवाई के दौरान विशिष्ट लोक अभियोजक जितेंद्र कुमार सैनी ने न्यायालय के समक्ष 22 गवाहों और 23 दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य तब सामने आया जब फॉरेंसिक जांच में पीड़िता के कपड़ों पर मिले मानव सीमेन का डीएनए आरोपी के डीएनए से मेल खा गया। इस वैज्ञानिक साक्ष्य ने आरोपी के अपराध को निर्णायक रूप से सिद्ध कर दिया।
न्यायालय की विशिष्ट पोक्सो न्यायाधीश रेखा राठौड़ ने सभी साक्ष्यों और गवाहियों का विस्तृत अवलोकन करते हुए आरोपी मोहम्मद सोहान सलमानी उर्फ शोएब को दोषी करार दिया और उसे 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं एक लाख रुपए अर्थदंड से दंडित किया।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिए कि अर्थदंड की राशि पीड़िता को क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाए और अतिरिक्त तीन लाख रुपए राज्य सरकार की पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत प्रदान किए जाएं। यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में एक सशक्त कदम है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि नाबालिगों के साथ दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराधों के लिए समाज में कोई स्थान नहीं है।
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Pratahkal Bureau
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