दौसा। देशभक्ति की भावनाओं से ओतप्रोत वातावरण में बुधवार को विशिष्ट केंद्रीय कारागृह, श्यालावास में एक अनूठा और प्रेरक आयोजन देखने को मिला। ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर कारागृह परिसर में बंदियों और स्टाफ़ ने मिलकर मानव श्रृंखला बनाकर ‘वंदे मातरम्’ शब्द की जीवंत आकृति तैयार की, जिसने हर किसी के मन को भावविभोर कर दिया।

लगभग चार सौ बंदियों ने तिरंगा लहराते हुए ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के गगनभेदी नारों से पूरा जेल परिसर देशभक्ति के रंग में रंग दिया। यह दृश्य न केवल देखने योग्य था, बल्कि उस भावना का प्रतीक भी था जो बंदियों में सुधार, एकता और राष्ट्रप्रेम के बीज बोती है।

कार्यक्रम के दौरान जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ ने कहा कि यह आयोजन भारत माता की आराधना का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा, “भारत माता की आराधना केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्म में झलकनी चाहिए। जब व्यक्ति अपने कर्म से देश की सेवा करता है, वही सच्ची श्रद्धा होती है।” उन्होंने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य बंदियों में राष्ट्रभावना, अनुशासन और आत्मसुधार की चेतना जगाना है।

इस अवसर पर जेलर विकास बागोरिया, उप जेलर दिलावर ख़ान, प्लाटून कमांडर मनेश कुमार सहित जेल प्रशासन के अनेक अधिकारी उपस्थित रहे। आयोजन में बंदियों संदीप अग्रवाल, विकास शर्मा और दीनदयाल ने विशेष योगदान दिया।

देशभक्ति गीतों और नारों से गूंजते कार्यक्रम में बंदियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने भीतर छिपी राष्ट्रभक्ति और निष्ठा का भाव प्रकट किया। कार्यक्रम का समापन ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गान से हुआ, जिसने पूरे कारागृह वातावरण को एकता, उत्साह और भावनात्मक ऊर्जा से भर दिया।

श्यालावास केंद्रीय कारागृह का यह आयोजन इस बात का सजीव उदाहरण बन गया कि राष्ट्रप्रेम और आत्मसुधार की भावना किसी दीवार में कैद नहीं की जा सकती — जब मन में मातृभूमि के प्रति श्रद्धा हो, तब हर दिल आज़ाद होता है।

Pratahkal Bureau

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