पत्नी की मौत 80 लाख, मां की एक्सीडेंट 22 लाख और पिता की मौत 50 करोड़, सिर्फ बीमा के लिए विशाल सिंघल ने की अपनों की हत्या...
आधार कार्ड और पैन कार्ड में उम्र संबंधी विसंगतियां, दुर्घटना में शामिल वाहन का पंजीकरण न देना और मेरठ के आनंद अस्पताल में मृत दर्शाने जैसी घटनाएं जांच के दौरान सामने आईं।

हापुड़। बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के आरोप में एक परिवारिक हत्याकांड सामने आया है। पुलिस ने मेरठ निवासी विशाल सिंघल और उसके साथी सतीश कुमार को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि मृतक फोटोग्राफर और व्यवसायी मुकेश सिंघल के पुत्र विशाल ने बीमा के लालच में अपने ही परिवार के सदस्यों की हत्या की साजिश रची और उसे अंजाम दिया।
निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि संजय कुमार ने बताया कि मृतक मुकेश सिंघल की कुल बीमा पॉलिसियों की राशि करीब 39 करोड़ रुपये थी। मुकेश की सालाना आय लगभग 12 से 15 लाख रुपये थी, लेकिन बीमा क्लेम राशि उनके वास्तविक आय से कई गुना अधिक थी। संजय कुमार ने आरोप लगाया कि विशाल सिंघल ने बीमा कंपनियों में क्लेम के लिए कई दस्तावेजों में भी गड़बड़ी की और जांच में सहयोग नहीं किया।
पुलिस के अनुसार, विशाल सिंघल की मां प्रभा देवी की 21 जून 2017 को पिलखुवा में सड़क दुर्घटना में मौत हुई थी। प्रभा, बेटे विशाल के साथ बाइक पर सवार थीं। दुर्घटना के बाद उन्हें सरस्वती मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हो गया। बीमा कंपनियों के मुताबिक, प्रभा की मौत के बाद विशाल को लगभग 80 लाख रुपये की बीमा राशि मिली। इस मामले में भी साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगे हैं।
इसके बाद, विशाल की पत्नी की मौत के बाद उन्हें करीब 30 लाख रुपये की बीमा राशि मिली। यही कारण है कि बीमा कंपनियों और पुलिस ने इस पर गंभीर संदेह जताया। पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक मुकेश सिंघल की 27 मार्च 2024 को गढ़ गंगा से लौटते समय सड़क दुर्घटना की घटनाओं में भी विसंगतियां थीं। नवजीवन अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार दुर्घटना रात में हुई, जबकि मृतक को अन्य अस्पताल में दिन में भर्ती दिखाया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और दुर्घटना में प्राप्त चोटों में मेल नहीं होने की बात भी सामने आई है।
जांच में यह भी पता चला कि विशाल सिंघल ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज पुलिस और बीमा अधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराए। आरोप है कि उन्होंने जांच टीम के एक अधिकारी को मामले को जल्दी निपटाने के लिए रिश्वत देने का प्रयास भी किया। गवाहों के बयान लेने पर भी पता चला कि कुछ गवाहों को रिश्वत दी गई थी। साथ ही, आधार कार्ड और पैन कार्ड में उम्र संबंधी विसंगतियां, दुर्घटना में शामिल वाहन का पंजीकरण न देना और मेरठ के आनंद अस्पताल में मृत दर्शाने जैसी घटनाएं जांच के दौरान सामने आईं।
निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधि संजय कुमार ने बताया कि विशाल सिंघल ने जांच के दौरान पूरी तरह से सहयोग नहीं किया और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज छिपाए। वहीं, पुलिस ने विशाल और उसके साथी सतीश को मोदीनगर रोड से गिरफ्तार कर न्यायिक कार्रवाई शुरू कर दी है। मामला अब कोर्ट में विचाराधीन है और आगे की जांच जारी है।
इस मामले ने न केवल हापुड़ और मेरठ की पुलिस को चौकस किया है, बल्कि बीमा कंपनियों के लिए भी चेतावनी का स्वरूप प्रस्तुत किया है। यह घटनाक्रम यह दर्शाता है कि आर्थिक लालच किस प्रकार परिवारिक रिश्तों को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बीमा क्लेम और वास्तविक जीवन परिस्थितियों के बीच अंतर की जांच में सतर्कता अत्यंत आवश्यक है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
