कौन है 1993 धमाकों के दोषी जिसे कोर्ट ने दिया बड़ा झटका? जानें क्या थी बॉम्बे हाई कोर्ट ने ₹17 लाख की मांग की अर्ज़ी
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 1993 मुंबई बम धमाकों के दोषी अबू सलेम की इमरजेंसी पैरोल याचिका ₹17 लाख सुरक्षा खर्च न देने पर खारिज कर दी।

आरोपी अबू सलेम
क्या हुआ?
मुंबई में कुख्यात अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को बड़ा झटका लगा है। 3 फरवरी 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसके इमरजेंसी पैरोल की मांग को खारिज कर दिया। अबू सलेम ने अपने बड़े भाई के निधन के बाद उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ स्थित पैतृक गांव जाने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट का साफ कहना था कि पुलिस एस्कॉर्ट और सुरक्षा व्यवस्था का पूरा खर्च आरोपी को ही उठाना होगा, जिसे सलेम ने चुकाने से इनकार कर दिया।
घटना की सूचना:
- तारीख: 3 फरवरी 2026
- स्थान: बॉम्बे हाई कोर्ट, मुंबई
- मामला: इमरजेंसी पैरोल की याचिका
- कारण: बड़े भाई का निधन
- याचिकाकर्ता: अबू सलेम (1993 मुंबई बम धमाकों का दोषी)
कौन है अबू सलेम?
- 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों का दोषी
- धमाकों में सैकड़ों लोगों की मौत हुई थी
- 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाया गया
- वर्तमान में लंबी सजा काट रहा है
कोर्ट का शुरुआती रुख:
हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि:
- अबू सलेम को पैरोल तभी मिल सकती है जब वह ₹17 लाख का पूरा सुरक्षा खर्च जमा करे
- सुरक्षा खर्च में विशेष पुलिस एस्कॉर्ट, ट्रांजिट और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं
- “सुरक्षा खर्च पर मोलभाव नहीं किया जा सकता” — कोर्ट की टिप्पणी
एस्कॉर्ट खर्च पर विवाद:
अबू सलेम के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि:
- आरोपी की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं
- वह ₹17 लाख नहीं, केवल ₹1 लाख देने में सक्षम है
पैरोल याचिका — अभी पूरी तरह बंद नहीं:
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार:
- हाई कोर्ट ने अबू सलेम को कुछ समय दिया है
- वह चाहे तो अपनी पैरोल याचिका वापस ले सकता है
- भुगतान न करने की स्थिति में पैरोल मिलना संभव नहीं
सजा और रिहाई को लेकर विवाद:
अबू सलेम की सजा को लेकर पहले से विवाद चला आ रहा है:
- उसने दावा किया कि वह 25 साल की सजा पूरी कर चुका है
- उसने रिहाई और रिमिशन की मांग की
- महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार ने इन दावों का विरोध किया
- मामला कई बार हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है
मुख्य बिंदु एक नज़र में:
- आरोपी: अबू सलेम
- कोर्ट: बॉम्बे हाई कोर्ट
- तारीख: 3 फरवरी 2026
- मांग: इमरजेंसी पैरोल
- वजह: बड़े भाई का निधन
- खर्च: ₹17 लाख पुलिस एस्कॉर्ट
- फैसला: पैरोल से इनकार
- स्थिति: कानूनी लड़ाई जारी
अपडेट:
आगे अपडेट जैसे ही:
- पैरोल याचिका पर अंतिम फैसला
- रकम जमा करने या याचिका वापस लेने की स्थिति
- रिहाई / रिमिशन से जुड़ा कोई नया आदेश
खबर को अपडेट किया जाएगा।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
