कौन है सोना पप्पू उर्फ बिस्वजीत पोद्दार? आखिर कैसे एक ज्वेलर के बेटे ने करोड़ों का अवैध साम्राज्य?
कोलकाता में ईडी ने कुख्यात अपराधी सोना पप्पू उर्फ बिस्वजीत पोद्दार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 ठिकानों पर छापेमारी की है। इस दौरान जॉय कामदार के घर से 1.2 करोड़ कैश और अपराधी के आवास से हथियार बरामद हुए हैं। मनी लॉन्ड्रिंग और सिंडिकेट राज के इस काले साम्राज्य पर देखिए हमारी विशेष रिपोर्ट।

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को कुख्यात अपराधी बिस्वजीत पोद्दार उर्फ 'सोना पप्पू' के खिलाफ एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। मनी लॉन्ड्रिंग के जाल को खंगालने उतरी ईडी की टीमों ने कोलकाता के आठ अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की, जिससे शहर के आपराधिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें जॉय कामदार (सन ग्रुप) के ठिकानों से 1.2 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और सोना पप्पू के आवास से एक देसी रिवॉल्वर की बरामदगी ने अपराध और अवैध धन के खतरनाक गठजोड़ को उजागर कर दिया है।
इस पूरे ऑपरेशन का केंद्र बिंदु बिस्वजीत पोद्दार है, जो फिलहाल पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और फरार चल रहा है। ईडी की टीमें सोना पप्पू के आवास, उसके व्यावसायिक परिसरों और उसके करीबियों—जिनमें बाबू सोना उर्फ राहुल दास, सन ग्रुप और जॉय कामदार शामिल हैं—के ठिकानों पर सघन तलाशी ले रही हैं। जांच का मुख्य उद्देश्य अवैध निर्माण और सिंडिकेट कारोबार के जरिए अर्जित की गई काली कमाई के स्रोत का पता लगाना और उस धन को वैध बनाने (मनी लॉन्ड्रिंग) की प्रक्रिया का पर्दाफाश करना है। हाल ही में कांकुलिया इलाके में हुई हिंसा का मास्टरमाइंड भी पोद्दार को ही माना जा रहा है, जिसके बाद से उसकी तलाश तेज कर दी गई थी।
सोना पप्पू का आपराधिक सफर किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। पिकनिक गार्डन में अपने पिता की ज्वेलरी शॉप के नाम पर 'सोना' उपनाम पाने वाले इस अपराधी ने बहुत जल्द ही कोलकाता के निर्माण और सिंडिकेट व्यवसाय में अपना दबदबा कायम कर लिया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 2010-11 से निर्माण क्षेत्र में सक्रिय पोद्दार पर हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, बलात्कार और आर्म्स एक्ट के कम से कम 15 गंभीर मामले दर्ज हैं। 2017 में बेदियाडांगा हत्या कांड और 2015 में बालिगंज रेल यार्ड पर कब्जे को लेकर हुआ विवाद उसके बढ़ते दुस्साहस की गवाही देते हैं। राजनीतिक संरक्षण के आरोपों के बीच उसने कई बार जेल की हवा खाई, लेकिन हर बार जमानत पर बाहर आकर अपने साम्राज्य को विस्तार दिया।
ईडी की इस ताजा रेड ने सिंडिकेट राज और सफेदपोश अपराधियों के बीच के संबंधों पर गहरी चोट की है। जब्त किए गए दस्तावेजों और भारी मात्रा में नकद ने इस बात की पुष्टि की है कि अवैध निर्माण से प्राप्त आय का एक बड़ा हिस्सा हवाला और अन्य माध्यमों से घुमाया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि यह छापेमारी अभी जारी रह सकती है और आने वाले दिनों में कुछ अन्य प्रभावशाली नामों पर भी गाज गिर सकती है। यह कार्रवाई न केवल एक अपराधी को पकड़ने की कवायद है, बल्कि कोलकाता के सिंडिकेट कल्चर की जड़ों को हिलाने का एक ठोस प्रयास भी है, जो लंबे समय से कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
