UP ATS ने पकड़ी ब्लास्ट की खतरनाक साजिश ; ISI से जुड़े 2 आतंकी हुए गिरफ्तार
नोएडा में यूपी एटीएस ने ISI से जुड़े 2 युवकों को गिरफ्तार कर दिल्ली-एनसीआर में बड़े आतंकी हमले की साजिश का खुलासा किया। सोशल मीडिया के जरिए भर्ती, स्लीपर सेल नेटवर्क, हथियार बरामदगी और अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर्स की भूमिका ने देश की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे को उजागर किया।

UP ATS द्वारा गिरफ्तार किए गए संदिग्ध तुषार चौहान (बाएं) और समीर खान (दाएं)
देश की आंतरिक सुरक्षा को निशाना बनाने वाली एक खतरनाक साजिश का पर्दाफाश करते हुए उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने नोएडा से दो युवकों को गिरफ्तार किया है, जिनके तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से जुड़े बताए जा रहे हैं। इस कार्रवाई ने न केवल एक बड़े आतंकी हमले को टाल दिया, बल्कि देश में सक्रिय स्लीपर सेल नेटवर्क के खतरनाक विस्तार की ओर भी इशारा किया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तुषार चौहान, जो हिजबुल्लाह अली खान के नाम से भी जाना जाता है, और समीर खान के रूप में हुई है। दोनों की उम्र लगभग 20 वर्ष बताई जा रही है। जांच में सामने आया है कि ये दोनों दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में ग्रेनेड हमले और टारगेट किलिंग जैसे गंभीर आतंकी हमलों की योजना बना रहे थे। खुफिया इनपुट्स के अनुसार, इन्होंने भीड़भाड़ वाले स्थानों जैसे मॉल और सार्वजनिक जगहों की रेकी भी की थी, हालांकि संभावित टारगेट्स की सटीक जानकारी अभी जांच के दायरे में है।
एटीएस के अनुसार, यह कार्रवाई उन खुफिया सूचनाओं के आधार पर की गई, जिनमें बताया गया था कि पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के निर्देश पर ये युवक भारत की आंतरिक सुरक्षा को कमजोर करने की साजिश में शामिल थे। जांच में यह भी सामने आया कि ये लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, खासकर इंस्टाग्राम के जरिए युवाओं को भड़काने और भर्ती करने का काम कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि इन आरोपियों को पाकिस्तान स्थित एजेंट्स और गैंगस्टर्स द्वारा ऑनलाइन माध्यम से कट्टरपंथी बनाया गया और उन्हें आर्थिक लालच तथा विदेश में सुरक्षित ठिकाने का झांसा देकर इस नेटवर्क में शामिल किया गया। इस साजिश में अंतरराष्ट्रीय अपराधी शाहजाद भट्टी और आबिद जट्ट की भूमिका भी सामने आई है, जिनके साथ मिलकर ये आरोपी स्लीपर सेल तैयार करने, टारगेट किलिंग की योजना बनाने और संवेदनशील स्थानों की रेकी कर रहे थे।
एटीएस ने आरोपियों के पास से एक पिस्टल, जिंदा कारतूस, चाकू और कई डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि शाहजाद भट्टी ने तुषार को तीन लाख रुपये देने का वादा किया था, जिसमें से कुछ रकम एडवांस में दी जा चुकी थी। साथ ही हमले के बाद दुबई के रास्ते पाकिस्तान पहुंचाने और पासपोर्ट की व्यवस्था करने का भी भरोसा दिया गया था।
इस पूरे नेटवर्क के पीछे ISI से जुड़े कथित अधिकारियों, जिन्हें मेजर हमीद, मेजर इकबाल और मेजर अनवर के नाम से पहचाना गया है, की संलिप्तता भी सामने आई है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने हथियारों और फंडिंग की आपूर्ति में भूमिका निभाई। दूसरी ओर, समीर खान को ‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ नामक एक कथित कट्टरपंथी संगठन के विस्तार की जिम्मेदारी दी गई थी। उसका काम नए युवाओं की भर्ती करना और ग्रैफिटी के जरिए प्रचार-प्रसार कर डर और अस्थिरता का माहौल बनाना था।
इसी क्रम में एटीएस ने हाल ही में दो और आरोपियों, 21 वर्षीय राजवीर और 19 वर्षीय विवेक वंजार को भी गिरफ्तार किया है, जो दिल्ली-एनसीआर में बम विस्फोट की योजना बना रहे थे। जांच में सामने आया है कि इन्हें भी शाहजाद भट्टी के नेटवर्क के जरिए ही भर्ती किया गया था। इस मामले में लखनऊ स्थित एटीएस थाने में भारतीय न्याय संहिता 2023, आर्म्स एक्ट और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
यह पूरा घटनाक्रम इस बात की गंभीर चेतावनी है कि किस तरह अंतरराष्ट्रीय आतंकी और आपराधिक नेटवर्क भारत के युवाओं को निशाना बनाकर देश की सुरक्षा को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं। एटीएस की यह कार्रवाई न केवल एक बड़े खतरे को टालने में सफल रही है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए आगे की सतर्कता और सख्ती की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
