नोएडा की 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे परिवार और समाज को झकझोर कर रख दिया है। महज पांच महीने पहले विवाह बंधन में बंधी ट्विशा का शव मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित उनके ससुराल में फंदे से लटका हुआ पाया गया। इस घटना के बाद उनके परिजनों ने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और गंभीर घरेलू हिंसा के आरोप लगाए हैं, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।

जानकारी के अनुसार, ट्विशा शर्मा ने दिसंबर 2025 में भोपाल निवासी अधिवक्ता समरथ सिंह से विवाह किया था। परिजनों का आरोप है कि 12 मई 2026 की रात ट्विशा ने अपनी मां को करीब 10:05 बजे फोन कर अपने साथ हो रहे कथित उत्पीड़न के बारे में बताया था। बातचीत के दौरान, जैसे ही उनके पति कमरे में पहुंचे, कॉल अचानक कट गई। इसके बाद परिवार ने लगातार उन्हें, उनके पति समरथ सिंह और सास गिरीबाला सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

करीब 10:15 बजे सास गिरीबाला सिंह ने कॉल रिसीव किया, जिसके बाद परिवार ने तुरंत ट्विशा की स्थिति देखने का आग्रह किया। कुछ ही मिनटों बाद, लगभग 10:20 बजे परिवार को सूचना दी गई कि ट्विशा “बेहोश” हैं। बाद में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मृतका के भाई और भारतीय सेना के अधिकारी मेजर हर्षित शर्मा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ट्विशा को लगातार मानसिक प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ रहा था। उनके अनुसार, दहेज और आर्थिक संपत्ति को लेकर भी दबाव बनाया जा रहा था। परिवार का यह भी दावा है कि ट्विशा के गर्भावस्था के दौरान उन पर गर्भपात के लिए दबाव डाला गया और बच्चे की वैधता पर सवाल उठाकर उनके चरित्र पर संदेह किया गया। परिजनों के अनुसार, अत्यधिक मानसिक दबाव के चलते बाद में गर्भ का चिकित्सकीय समापन (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) कराया गया।

परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि विवाह के बाद ट्विशा को नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया और उन्हें “बेकार” कहकर ताना दिया जाता था। इसके अलावा, पिता द्वारा दिए गए लगभग 20 लाख रुपये के निवेश और शेयरों को ससुराल पक्ष द्वारा अपने नाम करवाने का दबाव भी बनाया जा रहा था। परिजनों का कहना है कि मृतका के शरीर पर चोट के निशान भी पाए गए थे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में “मल्टीपल एंटेमॉर्टम इंजरीज़” का उल्लेख होने से मामले ने और गंभीर मोड़ ले लिया है। हालांकि अभी तक कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने इस मामले में पति समरथ सिंह और सास गिरीबाला सिंह के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जांच के दौरान मेडिकल रिपोर्ट से यह भी सामने आया है कि गर्भावस्था का चिकित्सकीय समापन घटना से लगभग एक सप्ताह पहले किया गया था। पुलिस ने विसरा, रक्त नमूने, नाखूनों के सैंपल और कपड़ों को फॉरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित किया है। इसके साथ ही, अन्य वैज्ञानिक जांच के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य भी एकत्र किए गए हैं, जबकि गर्भाशय को हिस्टोपैथोलॉजिकल परीक्षण के लिए संरक्षित रखा गया है।

फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि यह मामला आत्महत्या का है या फिर इसके पीछे किसी प्रकार की आपराधिक साजिश या प्रताड़ना का परिणाम है। दोनों पक्षों के बयान, कॉल रिकॉर्ड और फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी को उजागर करता है, बल्कि विवाह के बाद महिलाओं के साथ होने वाले कथित उत्पीड़न और सामाजिक दबावों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच के निष्कर्ष आने के बाद ही इस पूरे प्रकरण की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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