आखिर कैसे खुली फंदे की गांठ? ट्विशा केस में पति समर्थ और सास गिरिबाला का CBI ने लिया कड़ा टेस्ट!
केंद्रीय जांच ब्यूरो की टीम ने फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ गवाहों के बयानों का सत्यापन करने के लिए डमी पुतले की मदद से घटनाक्रम की कड़ियों को जांचा।

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत की पड़ताल के तहत केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह के आवास परिसर में डमी पुतले के साथ साक्ष्य जुटाए।
Twisha Sharma case : देश को झकझोर कर रख देने वाले बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले की परतें खोलने और बंद कमरों में छिपे सच को बेपर्दा करने के लिए देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बेहद बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। सोमवार, 1 जून 2026 को इस रहस्यमयी मौत की गुत्थी सुलझाने के उद्देश्य से सीबीआई की एक उच्चस्तरीय टीम भारी पुलिस बंदोबस्त और केंद्रीय फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ मुख्य आरोपी और पूर्व जज गिरिबाला सिंह के आवास पर धमक पड़ी। जांच एजेंसी ने पूरी घटना की कड़ियों को जोड़ने, गवाहों के बयानों की सत्यता को परखने और उस खौफनाक दिन के वास्तविक घटनाक्रम को समझने के लिए गिरिबाला सिंह के घर पर ही 'क्राइम सीन रीक्रिएशन' की एक बेहद जटिल और सस्पेंस से भरी प्रक्रिया को अंजाम दिया।
सोमवार दोपहर करीब 12 बजे जब सीबीआई की गाड़ियां फोरेंसिक टीम के साथ पूर्व जज गिरिबाला सिंह के घर के बाहर रुकीं, तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। जांच टीम अपने साथ ट्विशा शर्मा के वजन और कद-काठी के बराबर की एक डमी बॉडी (पुतला) और कई रहस्यमयी बोरे लेकर आई थी। सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, करीब दो घंटे से भी अधिक समय तक घर की छत और उस संवेदनशील हिस्से में सीन रीक्रिएशन का यह हाई-वोल्टेज प्रोसेस लगातार चलता रहा। इस दौरान वहां का माहौल बेहद तनावपूर्ण था, जहां सीबीआई के कड़े रुख के बीच मुख्य आरोपी और मृतका के पति समर्थ सिंह के साथ-साथ उसकी मां गिरिबाला सिंह को भी घटना के समय की हर छोटी-बड़ी परिस्थिति को लाइव डेमोंस्ट्रेशन के जरिए हुबहू दोहराने का सख्त आदेश दिया गया।
क्राइम सीन रीक्रिएशन के दौरान जो दृश्य सामने आए, उन्होंने इस मिस्ट्री को और गहरा कर दिया है। पूछताछ और लाइव डेमो के तहत पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने जांच अधिकारियों के सामने डमी बॉडी के गले से बेल्ट काटने की पूरी प्रक्रिया को करके दिखाया, जबकि उनके बेटे समर्थ सिंह ने डमी को अपने हाथों से उठाकर यह समझाया कि उसने किस तरह शव को नीचे उतारा था। इस बेहद गंभीर और वैधानिक प्रक्रिया के दौरान सीबीआई ने घटना के समय मौजूद लोगों की सटीक शारीरिक स्थिति और उनकी गतिविधियों का मिलान अब तक दर्ज बयानों से किया। सच और झूठ का फासला मिटाने के लिए जांच एजेंसी ने न केवल मां-बेटे को आमने-सामने बिठाया, बल्कि उनके पास में ही रहने वाले एक करीबी रिश्तेदार स्वराज सिंह को भी मौके पर समन देकर बुलाया और उनसे कड़ाई से विस्तृत पूछताछ की।
सीबीआई की इस तफ्तीश का दायरा केवल सीन रीक्रिएशन तक ही सीमित नहीं था, बल्कि जांच टीम ने दोनों मुख्य आरोपियों पर तीखे और असहज करने वाले सवालों की बौछार कर दी। जांच टीम ने पूछा कि ट्विशा को सबसे पहले फंदे पर लटके हुए किसने देखा, उसे अस्पताल ले जाने में इतनी देरी क्यों की गई, क्या फंदा खोलते वक्त उसकी सांसें चल रही थीं और क्या उसे बचाने के लिए कोई प्राथमिक उपचार या सीपीआर दिया गया था? इसके अलावा, मृतका के शरीर पर पाए गए संदिग्ध चोट के निशानों, गंभीर घरेलू कलह, दहेज की प्रताड़ना और संदिग्ध आर्थिक लेन-देन को लेकर भी बेहद कड़े सवाल पूछे गए। इन तीखे सवालों के जवाब में पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए दावा किया कि ट्विशा गंभीर पर्सनैलिटी डिसऑर्डर और एंजाइटी (चिंता) की शिकार थी, और वह अपनी प्रेग्नेंसी को लेकर बेहद परेशान रहने के कारण बच्चा नहीं चाहती थी। हालांकि, जब सीबीआई ने उनसे ट्विशा के शरीर पर मिले गहरे जख्मों और घटना के तुरंत बाद बेटे समर्थ सिंह के फरार होने पर सवाल दागा, तो वे बगले झांकने लगीं और समर्थ के भागने को महज एक 'गलती' बताकर टालने की कोशिश की।
दूसरी तरफ, पति समर्थ सिंह ने जांच एजेंसी के सामने रोते हुए खुद को बेकसूर बताने का प्रयास किया और कहा कि वह अपनी पत्नी से बेहद प्यार करता था और घटना वाले दिन दोनों ने साथ में टहलने के बाद खाना खाया और टीवी देखा था। समर्थ ने अपनी दलील में ट्विशा के मानसिक तनाव का पूरा ठीकरा उसकी गर्भावस्था पर फोड़ते हुए कहा कि वह गर्भनिरोधक दवाइयों के अत्यधिक इस्तेमाल और बच्चे को रखने या न रखने के असमंजस के कारण भारी डिप्रेशन में आ गई थी। कानूनी और आधिकारिक मोर्चे पर, पूर्व जज के घर पर हुआ यह सीन रीक्रिएशन इस हाई-प्रोफाइल मामले की चार्जशीट दाखिल करने और आरोपियों की संलिप्तता तय करने में सबसे बड़ा वैज्ञानिक साक्ष्य बनने जा रहा है। सीबीआई द्वारा जुटाए गए ये फोरेंसिक और डिजिटल सबूत इस बात का अंतिम फैसला करेंगे कि यह आत्महत्या का एक दुखद मामला था या फिर बंद कमरों के भीतर रची गई एक खौफनाक और सोची-समझी हत्या की साजिश, जिसका असर देश की न्याय प्रणाली पर भी पड़ना तय है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
