कॉर्पोरेट की आड़ में धर्मांतरण का 'गंदा खेल'- नासिक TCS कांड की पीड़िता की आपबीती सुनकर कांप उठेगा कलेजा।
जबरन नमाज और धर्मांतरण के दबाव के बीच SIT और ATS ने संभाली जांच, अंतरराष्ट्रीय फंडिंग की भी हो रही है पड़ताल।

नासिक पुलिस की गिरफ्त में धर्मांतरण मामले के आरोपी और मामले की मुख्य संदिग्ध निदा खान।
नासिक TCS धर्मांतरण कांड: कॉर्पोरेट गलियारों में साजिश का पर्दाफाश, SIT और ATS की बढ़ी सक्रियता
नासिक: महाराष्ट्र के नासिक में स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की बीपीओ यूनिट में सामने आए धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न के मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है。 इस गंभीर मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए महाराष्ट्र पुलिस ने 12 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, वहीं आतंकवाद निरोधी दस्ता (ATS) भी विदेशी फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के एंगल से जांच में जुट गया है。 आरोप है कि कंपनी के भीतर काम करने वाली एचआर एग्जीक्यूटिव निदा खान और टीम लीडर तौसीफ अत्तर ने मिलकर कर्मचारियों पर इस्लाम अपनाने के लिए मानसिक और शारीरिक दबाव बनाया。 अब तक इस मामले में कुल 9 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें जबरन नमाज पढ़वाने से लेकर बलात्कार जैसे संगीन आरोप शामिल हैं。
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह अवैध गतिविधियां पिछले तीन से चार वर्षों से कंपनी के भीतर संचालित हो रही थीं。 मुख्य आरोपी तौसीफ अत्तर, जो मक्का से लौटने के बाद कट्टरपंथी विचारधारा की ओर झुक गया था, कथित तौर पर कर्मचारियों का ब्रेनवॉश करता था。 वह हिंदू धर्म के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणियां करता और कर्मचारियों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करता था कि इस्लाम अपनाने से उनकी पारिवारिक समस्याएं और बीमारियां ठीक हो जाएंगी。 वहीं, निदा खान पर आरोप है कि वह महिला कर्मचारियों को निशाना बनाती थी, उन्हें मजहबी तालीम देती और नमाज पढ़ना सिखाती थी。 पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें कलमा पढ़ने और बुर्का पहनने के लिए भी मजबूर किया गया।
इस मामले का एक और भयावह पहलू यौन शोषण से जुड़ा है। एक पीड़िता ने आरोप लगाया है कि तौसीफ ने शादी का झांसा देकर उसके साथ बलात्कार किया, जबकि वह पहले से शादीशुदा था। आरोपियों ने अपनी प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग करते हुए उन कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जिन्होंने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया。 जांच के दायरे में कंपनी की ऑपरेशंस हेड अश्विनी चैनानी भी हैं, जिन्हें पुलिस ने इस आधार पर गिरफ्तार किया है कि उन्होंने पीड़ितों द्वारा भेजी गई 78 से अधिक ई-मेल शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की。 पुलिस का तर्क है कि यदि समय रहते प्रबंधन ने कदम उठाए होते, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
वर्तमान में, निदा खान पुलिस की गिरफ्त से बाहर है और फरार चल रही है, जिसकी तलाश में पुलिस की चार टीमें मुंबई और अन्य शहरों में छापेमारी कर रही हैं। जांच एजेंसियां अब इस मामले के अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को भी खंगाल रही हैं, जिसमें मलेशिया के एक व्यक्ति इमरान खान का नाम सामने आया है。 पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस संगठित धर्मांतरण सिंडिकेट को विदेश से वित्तीय सहायता मिल रही थी。 टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने इस घटना को अत्यंत चिंताजनक बताते हुए कंपनी की ओर से 'जीरो टॉलरेंस' की नीति दोहराई है और आंतरिक जांच के लिए मुख्य परिचालन अधिकारी आरती सुब्रमण्यम को नियुक्त किया है。 यह घटना न केवल कॉर्पोरेट सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि कार्यस्थल पर कर्मचारियों की सुरक्षा और जवाबदेही के मानकों पर भी नए सिरे से बहस छेड़ती है।

Lalita Rajput
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