नई दिल्ली:

लद्दाख के प्रसिद्ध जलवायु और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर कानूनी प्रक्रिया में एक नया मोड़ आया है। देश की शीर्ष अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने वांगचुक की हिरासत को चुनौती देने वाली उनकी पत्नी, गीतांजलि की याचिका पर सुनवाई बंद कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि चूंकि वांगचुक को पहले ही रिहा किया जा चुका है और उन पर लगा सख्त कानून हटा लिया गया है, इसलिए अब इस याचिका का कोई आधार नहीं रह गया है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: क्यों बंद हुई सुनवाई?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ को सूचित किया गया कि सोनम वांगचुक पर लगाया गया राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) 14 मार्च 2026 को ही वापस ले लिया गया था। इसके साथ ही उन्हें हिरासत से मुक्त भी कर दिया गया है। इन तथ्यों को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने कहा, "जब एनएसए (NSA) हटा लिया गया है और व्यक्ति रिहा हो चुका है, तो इस याचिका में अब आगे विचार करने के लिए कुछ नहीं बचा है।" इसी आधार पर अदालत ने याचिका को 'निष्प्रभावी' (Infructuous) मानते हुए मामले को समाप्त कर दिया।

गृह मंत्रालय का कदम और रिहाई की पृष्ठभूमि

सोनम वांगचुक की रिहाई का निर्णय गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद आया। 14 मार्च को मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया कि गहन विचार-विमर्श के बाद सरकार ने वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला किया है। सरकार ने यह भी दोहराया कि वह लद्दाख की सुरक्षा और वहां के नागरिकों की मांगों के प्रति गंभीर है।

विवाद की जड़: क्या था पूरा मामला?

यह पूरा विवाद सितंबर 2025 में लद्दाख में हुई हिंसा से शुरू हुआ था। लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष दर्जा और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लेह में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे।

  • हिंसा की घटना: 24 सितंबर 2025 को हुए प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें दुर्भाग्यवश चार लोगों की जान चली गई और लगभग 90 लोग घायल हुए थे।
  • गिरफ्तारी: इस हिंसा को भड़काने के आरोपों के तहत 26 सितंबर 2025 को सोनम वांगचुक को हिरासत में लिया गया था। बाद में उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) भी लगा दिया गया था, जिसकी चौतरफा आलोचना हुई थी।

दिल्ली हाईकोर्ट में जारी रहेगी कानूनी लड़ाई

भले ही सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी की याचिका का निपटारा कर दिया हो, लेकिन इस प्रकरण से जुड़े अन्य कानूनी पहलू अभी भी जीवित हैं। दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले से संबंधित अन्य याचिकाओं और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सुनवाई कर रहा है। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 अगस्त 2026 की तारीख तय की है।

लद्दाख की मांगें और भविष्य की राह

सोनम वांगचुक की रिहाई के बाद अब सबका ध्यान लद्दाख की राजनीतिक मांगों पर है। वांगचुक और उनके समर्थक लंबे समय से पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख के लिए लोकतांत्रिक अधिकारों की वकालत कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से व्यक्तिगत हिरासत का मुद्दा भले ही हल हो गया हो, लेकिन लद्दाख के दर्जे को लेकर केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद है।

सोनम वांगचुक की रिहाई और सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले के निपटारे ने फिलहाल के लिए एक बड़े कानूनी विवाद को शांत कर दिया है। हालांकि, सामाजिक और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा अब भी गर्म है कि लद्दाख की मांगों का स्थायी समाधान क्या होगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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