पहले 1 लाख में ख़रीदा और फिर कहा मनहूस ; जानें MP के हाईवे पर मिली ढाई साल की बच्ची की कहानी
मध्य प्रदेश के श्योपुर में एक दंपति ने अवैध रूप से खरीदी गई ढाई साल की बच्ची को ‘मनहूस’ मानकर हाईवे पर छोड़ दिया। पुलिस जांच में इंदौर-भोपाल से जुड़े बाल तस्करी रैकेट का खुलासा हुआ, जबकि आरोपियों को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

हाईवे पर बच्ची को छोड़ने के मामले में बाल तस्करी रैकेट का खुलासा
मध्य प्रदेश के श्योपुर ज़िले से सामने आया एक मामला न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोरता है, बल्कि समाज में व्याप्त अंधविश्वास और संगठित अपराध के खतरनाक गठजोड़ को भी उजागर करता है। यहां एक दंपति ने पहले एक मासूम बच्ची को अवैध रूप से खरीदा और फिर उसे “मनहूस” मानकर सुनसान हाईवे पर छोड़ दिया। पुलिस जांच में यह मामला एक बड़े बाल तस्करी रैकेट से जुड़ा निकला है।
घटना 18 अप्रैल की है, जब गुना निवासी एक कारोबारी और उसकी पत्नी ने कथित तौर पर ढाई साल की बच्ची को श्योपुर ज़िले के सोईंकलां के पास नेशनल हाईवे-552 पर छोड़ दिया। डायल-112 पर मिली सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, जहां बच्ची पूरी तरह अकेली मिली। उसे तुरंत सुरक्षित कर स्थानीय चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की देखरेख में रखा गया और मेडिकल जांच कराई गई।
प्रारंभिक जांच में यह मामला साधारण परित्याग का लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच आगे बढ़ाई, कहानी ने गंभीर मोड़ ले लिया। आरोपियों को भोपाल से ट्रेस किया गया, जहां उन्होंने पहले दावा किया कि बच्ची को उन्होंने कानूनी रूप से गोद लिया है। हालांकि, कड़ी पूछताछ के दौरान यह दावा टूट गया और उन्होंने स्वीकार किया कि बच्ची को इंदौर के एक ब्यूटी पार्लर संचालक और उसके साथियों के जरिए अवैध नेटवर्क से खरीदा गया था।
पुलिस के अनुसार, इस बच्ची को जन्म के कुछ ही दिनों बाद तस्करी के जरिए बेचा गया था। जांच में सामने आया है कि इंदौर और भोपाल के बीच सक्रिय एक संगठित गिरोह नवजात बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त में लिप्त है। इस खुलासे ने मामले को और भी गंभीर बना दिया है, जिसमें कई अन्य संदिग्धों की भूमिका सामने आ रही है।
दंपति ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने बच्ची को एक लाख रुपये में खरीदा था। बाद में कारोबारी को हुए आर्थिक नुकसान के बाद दोनों ने यह मान लिया कि बच्ची उनके लिए “मनहूस” है, और इसी अंधविश्वास के चलते उसे हाईवे पर छोड़ दिया गया। फिलहाल, पुलिस ने दंपति को गिरफ्तार कर लिया है और उनके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत बाल तस्करी, अवैध गोद लेने और परित्याग के आरोप दर्ज किए गए हैं। साथ ही, पूरे रैकेट का पर्दाफाश करने और बच्ची के जैविक माता-पिता का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
यह घटना न केवल कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि समाज के उस कड़वे सच को भी सामने लाती है, जहां अंधविश्वास और लालच मिलकर मासूम जिंदगियों को खतरे में डाल देते हैं। एक मासूम बच्ची के साथ हुआ यह व्यवहार इस बात की गंभीर याद दिलाता है कि बाल सुरक्षा और वैध गोद लेने की प्रक्रियाओं को लेकर जागरूकता और सख्ती कितनी जरूरी है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
