₹1.40 करोड़ का मुआवजा और 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा ; जानें क्या था 2020 का सथनकुलम कांड
तमिलनाडु के सथनकुलम में 2020 में पिता और पुत्र की कस्टोडियल हत्या के मामले में मदारू जिला अदालत ने नौ पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अदालत ने इसे “बहुत ही दुर्लभ” मामला बताया और पीड़ित परिवार को 1.40 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।

सथनकुलम कस्टोडियल हत्या मामले के मृतक प. जयाराज और उनके पुत्र जे. बेन्निक्स
तमिलनाडु के मदारू जिले में एक जिला अदालत ने 2020 में सथनकुलम में पिता और पुत्र की कस्टोडियल हत्या के मामले में नौ पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। यह फ़ैसला 6 अप्रैल 2026 को दिया गया और अदालत ने इसे “बहुत ही दुर्लभ” मामलों में गिना। अदालत ने कहा कि दोनों पीड़ितों पर हिरासत में जानबूझकर और बर्बर यातनाएं की गईं। सभी नौ अधिकारियों को पहले 23 मार्च 2026 को हत्या का दोषी पाया गया था और अब उन्हें सजा सुनाई गई।
मृतक प. जयाराज (58) और उनके पुत्र जे. बेन्निक्स (31) सथनकुलम के स्थानीय व्यापारी थे। उन्हें 19 जून 2020 को पुलिस ने COVID‑19 लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में हिरासत में लिया था, हालांकि बाद में यह आरोप निराधार पाया गया। दोनों पर हिरासत में रातभर लगातार बर्बर शारीरिक यातना की गई। बेन्निक्स 22 जून 2020 और जयाराज 23 जून 2020 को मौत के घाट उतरे।
अदालत ने पाया कि अधिकारियों ने दोनों व्यक्तियों को “मारने की नीयत से” प्रताड़ित किया। दोषी नौ पुलिसकर्मियों में निरीक्षक, उप-निरीक्षक, हेड कॉन्स्टेबल और कॉन्स्टेबल शामिल हैं। अदालत ने पीड़ित परिवार को सामूहिक रूप से 1.40 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया।
इस घटना ने पूरे देश में गहरा आक्रोश पैदा किया। 2020 में मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै बेंच ने स्वत: संज्ञान लिया और मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हवाले किया। मीडिया और जनसंपर्क ने मामले की व्यापक जांच और न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सथनकुलम मामले की पृष्ठभूमि इस प्रकार है: घटना का समय COVID‑19 लॉकडाउन का दौर था और यह एक छोटे शहर सथनकुलम में घटित हुई। पीड़ित जयाराज और बेन्निक्स पिता-पुत्र व्यापारी थे। उन्हें हिरासत में लेने का कथित कारण लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन था, जिसे बाद में निराधार पाया गया।
अधिकारियों ने 19 जून 2020 को दोनों को पुलिस स्टेशन से उठाया और रातभर यातनाएं जारी रहीं। इसमें गंभीर मारपीट, तनावपूर्ण स्थितियों में बैठाना और शारीरिक हमले शामिल थे। इन बर्बरताओं के कारण ही दोनों की मौत हुई। इस मामले में न्यायिक कार्रवाई भी विशेष रही। मद्रास उच्च न्यायालय (मदुरै बेंच) ने स्वत: संज्ञान लिया और CBI को जांच सौंपी। नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या, कस्टोडियल यातना और सत्ता के दुरुपयोग का मुकदमा चला।
सथनकुलम मामला भारत में कस्टोडियल मौतों और पुलिस बर्बरता के संदर्भ में एक मील का पत्थर है। यह पुलिस जवाबदेही, मानवाधिकार सुरक्षा और आपातकालीन परिस्थितियों में अधिकारियों के दुरुपयोग के खतरों को उजागर करता है। यह घटना सार्वजनिक और मीडिया दबाव के चलते न्यायपालिका के लिए भी एक चेतावनी बन गई।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
