मनी लॉन्ड्रिंग मामला: ब्रिटेन में आरोपी समीर जगिरदार को सात साल की कैद
लंदन के हैटन गार्डन स्थित प्योर नाइन्स कंपनी के निदेशक समीर जगिरदार को 266 मिलियन पाउंड के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लीड्स क्राउन कोर्ट ने सजा सुनाई।

स्वीर में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी समीर जगिरदार को दिखाया गया है।
ब्रिटेन में 266 मिलियन पाउंड की आपराधिक नकदी की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े बड़े मामले में एक और आरोपी को जेल की सजा सुनाई गई है। लंदन के हैटन गार्डन स्थित कंपनी प्योर नाइन्स (Pure Nines) के मालिक और निदेशक समीर जगिरदार (Samir Jagirdar) को 12 अक्टूबर 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सात साल की कैद हुई। वेस्ट यॉर्कशायर पुलिस के अनुसार, ब्रैडफोर्ड स्थित कबाड़ आभूषण कारोबार फाउलर ओल्डफील्ड (Fowler Oldfield) के इर्द-गिर्द चलाए गए इस नेटवर्क में आपराधिक नकदी को सोने की खरीद और दुबई भेजने के जरिए वैध कारोबार का रूप दिया जाता था।
58 वर्षीय जगिरदार क्रॉयडन के एडिसकॉम्ब रोड का निवासी है। लीड्स क्राउन कोर्ट में सजा सुनाए जाने के दौरान उसे कंपनी निदेशक बनने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया। उसने 2012 से 2016 के बीच हुई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी अपनी भूमिका का अपराध पहले ही स्वीकार कर लिया था।
वेस्ट यॉर्कशायर पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई की जांच में सामने आया कि प्योर नाइन्स कंपनी का इस्तेमाल ब्रैडफोर्ड स्थित ज्वेलर्स फाउलर ओल्डफील्ड तक नकदी पहुंचाने और उस रकम से सोना खरीदने के लिए किया जाता था। बाद में सोने को दुबई भेज दिया जाता था। जांच के मुताबिक, यह कंपनी वास्तविक सोने के कारोबार के बजाय नकदी पहुंचाने और उसे गिनने की व्यवस्था के रूप में काम कर रही थी।
इस मामले में अगस्त 2026 में दो लोगों को सजा सुनाई गई थी, जबकि चार अन्य को मार्च 2025 में सजा हुई थी। पुलिस की जांच में सामने आया कि फाउलर ओल्डफील्ड के जरिए कुल 266 मिलियन पाउंड से अधिक की आपराधिक नकदी का लेन-देन किया गया। यह जांच ब्रिटेन में आपराधिक नकदी की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी कानूनी इतिहास की सबसे बड़ी जांचों में से एक मानी गई है।
जांच वर्ष 2016 में शुरू हुई थी और इसका केंद्र ब्रैडफोर्ड स्थित कबाड़ आभूषण कंपनी फाउलर ओल्डफील्ड लिमिटेड थी। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले कूरियर बड़ी मात्रा में नकदी से भरे बैग कंपनी के हॉल लेन स्थित परिसर में पहुंचाते थे। कई मौकों पर यहां प्रतिदिन 1.7 मिलियन पाउंड तक की नकदी संसाधित की जाती थी। कंपनी इस रकम को अपने बैंक खाते में जमा कर उच्च शुद्धता वाला सोना खरीदती थी, जिसे फर्जी शिपिंग इनवॉइस के जरिए दुबई भेजा जाता था।
जांच में पता चला कि 2014 से 2016 के बीच 200 मिलियन पाउंड से अधिक की आपराधिक नकदी इसी तरीके से कंपनी के नैटवेस्ट बैंक खाते के जरिए लॉन्डर की गई। इस प्रक्रिया से अपराध से अर्जित धन को वैध कारोबार से प्राप्त रकम जैसा दिखाया जाता था। इससे आरोपियों को उन जांच प्रक्रियाओं से बचने में मदद मिलती थी, जिनका सामना उन्हें खुद बैंक में संदिग्ध नकदी जमा करने या उससे सोना खरीदने पर करना पड़ता।
आर्थिक अपराध इकाई को वर्ष 2016 में उस समय मामले की जानकारी मिली, जब एक सुरक्षा कंपनी ने परिसर से प्रतिदिन उठाई जा रही नकदी की मात्रा में भारी बढ़ोतरी पर चिंता जताई। फाउलर ओल्डफील्ड का वैध कारोबार सामान्य तौर पर नकद भुगतान करके कबाड़ आभूषण, जिसमें सोना भी शामिल था, खरीदने का था। हालांकि, बाद में कारोबार का स्वरूप बड़े पैमाने पर नकदी संसाधित करने की गतिविधि में बदल गया।
जांचकर्ताओं ने परिसर की निगरानी की। इसमें सामने आया कि कूरियर नियमित रूप से हॉल लेन स्थित इमारत में बड़े बैग लेकर पहुंचते थे। बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि कंपनी के खातों में आने वाली नकदी वर्ष 2012 में 11,000 पाउंड थी, जो अगले वर्ष बढ़कर 650,000 पाउंड से अधिक हो गई। वर्ष 2015 तक कंपनी में जमा होने वाली रकम बढ़कर 95 मिलियन पाउंड तक पहुंच गई थी।
सितंबर 2016 में पुलिस ने फाउलर ओल्डफील्ड के परिसर और लंदन के दो कारोबारों पर तलाशी वारंट लागू किए। इनमें हैटन गार्डन स्थित उससे जुड़ी कंपनी प्योर नाइन्स लिमिटेड भी शामिल थी। कार्रवाई के दौरान 16 लोगों को गिरफ्तार किया गया और चार मिलियन पाउंड से अधिक मूल्य की नकदी तथा सोना बरामद किया गया।
फाउलर ओल्डफील्ड के आंतरिक सीसीटीवी फुटेज में कर्मचारियों को बड़ी मात्रा में नोटों को स्वचालित मशीनों से गिनते और उन्हें वैध नकदी परिवहन कंपनियों द्वारा उठाए जाने के लिए पैक करते देखा गया। प्योर नाइन्स के परिसर में भी नकदी से भरा एक बड़ा बैग, नोट गिनने की स्वचालित मशीन और तिजोरी तथा कार्यस्थल पर नकदी के बंडल मिले।
तिजोरी में सोने की 147 छड़ों जैसी वस्तुएं भी मिलीं। हालांकि, विस्तृत जांच में पता चला कि उनमें से केवल एक छड़ असली सोने की थी। बाकी छड़ें कम मूल्य वाली चांदी की छड़ों पर सोने की परत चढ़ाकर बनाई गई नकली छड़ें थीं। इन्हें इस तरह तैयार किया गया था कि कंपनी वास्तविक सोने के कारोबार में शामिल दिखाई दे, जबकि उसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया जा रहा था।
आर्थिक अपराध इकाई ने इनवॉइस, ईमेल और दस्तावेजों का फॉरेंसिक विश्लेषण किया तथा 8,000 घंटे से अधिक की सीसीटीवी फुटेज की जांच की। इस प्रक्रिया में गणना की गई कि जनवरी 2014 से सितंबर 2016 के बीच फाउलर ओल्डफील्ड के खातों में 266 मिलियन पाउंड से अधिक जमा किए गए। अभियोजन पक्ष, क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के साथ समन्वय में, कई आरोपियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लेकर अदालत पहुंचा।
मार्च 2025 में लीड्स क्राउन कोर्ट में मुकदमे के बाद चार लोगों को मनी लॉन्ड्रिंग में दोषी ठहराए जाने पर जेल की सजा सुनाई गई थी। फाउलर ओल्डफील्ड के निदेशक डेनियल रॉसन, 49, निवासी साइक ग्रीन, स्कार्क्रॉफ्ट, लीड्स को 10 साल और 10 महीने की कैद हुई। कंपनी के दूसरे निदेशक ग्रेगरी फ्रैंकल, 48, निवासी शिपली को उनकी अनुपस्थिति में 11 साल और आठ महीने की सजा सुनाई गई। टॉलर लेन, ब्रैडफोर्ड के हारून राशिद, 56, को उनकी अनुपस्थिति में 10 साल और वेस्टमिंस्टर, लंदन के ट्रेवर प्लेस निवासी अर्जुन बब्बर, 34, को 11 साल की कैद सुनाई गई। पुलिस के मुताबिक, ये तीनों देश छोड़कर चले गए हैं। उन्हें ढूंढने और सजा काटने के लिए ब्रिटेन प्रत्यर्पित कराने की कार्रवाई जारी है।
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2016 तक फाउलर ओल्डफील्ड तक पहुंचाई गई अधिकांश रकम शाहिद कादर नामक व्यक्ति के जरिए भेजी गई थी। अदालत में उसे दुबई में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय मनी लॉन्ड्रर बताया गया। उसने समीर जगिरदार द्वारा स्थापित प्योर नाइन्स लिमिटेड का इस्तेमाल किया। साक्ष्यों से पता चला कि कंपनी के जरिए फाउलर ओल्डफील्ड तक नकदी पहुंचाई जाती थी और फिर उस रकम से खरीदे गए सोने को निर्यात किया जाता था।
जगिरदार के बहनोई बका हैदर की भूमिका भी जांच में सामने आई। दोनों ने कथित तौर पर फर्जी शिपिंग इनवॉइस तैयार किए और सोने को दुबई भेजने तथा वहां पहुंचाने के लिए यात्रा की। जुलाई 2026 में समाप्त हुए एक अन्य मुकदमे के बाद हैदर और फाउलर ओल्डफील्ड के कर्मचारी नाथन रिवर्स को मनी लॉन्ड्रिंग का दोषी ठहराया गया। इसके बाद 28 अगस्त 2026 को लीड्स क्राउन कोर्ट ने हैदर, 51, निवासी बॉब मार्ले वे, लैम्बेथ, लंदन को छह साल की कैद सुनाई। वहीं, रैथमेल रोड, लीड्स निवासी नाथन रिवर्स, 45, को 27 महीने की सजा दी गई, जिसे दो साल के लिए निलंबित कर दिया गया। उसके लिए कर्फ्यू की शर्त भी लगाई गई थी। जगिरदार ने मुकदमे से पहले ही मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध स्वीकार कर लिया था और उसे बाद में सजा सुनाई जानी थी।
वेस्ट यॉर्कशायर पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई की तत्कालीन प्रमुख और अब यॉर्कशायर एंड हंबर रीजनल ऑर्गनाइज्ड क्राइम यूनिट की प्रमुख रमोना सीनियर ने कहा कि इस आपराधिक नेटवर्क में दोषी ठहराए गए लोगों ने औद्योगिक स्तर पर आपराधिक नकदी को लॉन्डर करने वाली गतिविधि में भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इस नेटवर्क से गुजरने वाले हर नोट के पीछे समुदायों को गंभीर और संगठित अपराध से होने वाला नुकसान छिपा था। इसमें नियंत्रित नशीले पदार्थों की आपूर्ति और उससे जुड़ी गंभीर हिंसा के साथ मानव तस्करी तथा आधुनिक गुलामी के जरिए होने वाला शोषण भी शामिल है।
सीनियर ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग ऐसा अपराध नहीं है जिसका कोई पीड़ित न हो। इसमें शामिल लोग अपराधियों को दूसरों की पीड़ा से लाभ कमाने में मदद करते हैं। उन्होंने इस कार्रवाई को वेस्ट यॉर्कशायर पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई की अब तक की सबसे बड़ी जांच बताया। उनके मुताबिक, यह जटिल जांच और लंबी कानूनी प्रक्रिया विशेषज्ञ जांचकर्ताओं की दृढ़ता, कौशल तथा क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के साथ सहयोग के कारण दोषसिद्धि और सजा तक पहुंची। उन्होंने कहा कि पुलिस अपराधियों को अपनी गतिविधियां या उनसे अर्जित धन छिपाने की जगह नहीं देने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस मामले में बैंकिंग नियमन से जुड़ी कार्रवाई भी हुई थी। दिसंबर 2021 में वित्तीय आचरण प्राधिकरण (Financial Conduct Authority) द्वारा शुरू किए गए अभियोजन के बाद नैटवेस्ट पर 264,772,619.95 पाउंड का जुर्माना लगाया गया था। यह कार्रवाई 8 नवंबर 2012 से 23 जून 2016 के बीच फाउलर ओल्डफील्ड की बैंकिंग गतिविधियों की उचित निगरानी करने में विफल रहने और मनी लॉन्ड्रिंग नियमों का पालन नहीं करने से संबंधित थी।
मामले से जुड़ी एक अन्य कार्रवाई में ब्रैडफोर्ड के एपर्ली ब्रिज स्थित वाटरफ्रंट म्यूज निवासी गैरी स्मिथ, 62, पर प्रोसिड्स ऑफ क्राइम एक्ट 2002 की धारा 330 के तहत आरोप लगाया गया है। विनियमित क्षेत्र में काम करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट नहीं करने के आरोप में उसका मुकदमा 1 फरवरी 2027 से लीड्स क्राउन कोर्ट में शुरू होना निर्धारित है।
पुलिस ने इस मामले में अनुपस्थिति में दोषी ठहराए गए और सजा पाए ग्रेगरी फ्रैंकल, हारून राशिद तथा अर्जुन बब्बर की तलाश जारी रखी है। तीनों अपने मुकदमों में अदालत में पेश नहीं हुए थे और माना जाता है कि वे ब्रिटेन छोड़ चुके हैं। उनकी मौजूदा स्थिति का पता लगाने और उन्हें ब्रिटेन वापस लाकर सजा दिलाने के लिए जांच जारी है।
रमोना सीनियर ने कहा कि पुलिस इन तीनों को खोजकर ब्रिटेन वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास करने को प्रतिबद्ध है, ताकि वे अपनी सजा काट सकें। उन्होंने कहा कि इन लोगों को भुलाया नहीं जाएगा और उनके फरार रहने से केवल उनकी सजा शुरू होने में देरी हो रही है। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि यदि किसी के पास इन तीनों के वर्तमान ठिकाने या उनके संपर्क में रहने वाले लोगों के बारे में कोई जानकारी हो, भले ही वह मामूली लगे, तो पुलिस को तुरंत सूचित करें।
जानकारी रखने वाले लोग ऑपरेशन लार्कशॉट (Operation Larkshot) का उल्लेख करते हुए वेस्ट यॉर्कशायर पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई से 101 पर या www.westyorkshire.police.uk/livechat के जरिए संपर्क कर सकते हैं। जानकारी स्वतंत्र संस्था क्राइमस्टॉपर्स (Crimestoppers) को 0800 555 111 पर या https://crimestoppers-uk.org/give-information/forms/give-information-anonymously के जरिए गुमनाम रूप से भी दी जा सकती है। इस मामले में दोषी ठहराए गए लोगों के खिलाफ प्रोसिड्स ऑफ क्राइम एक्ट के तहत संपत्ति और अपराध से अर्जित धन से संबंधित कार्यवाही जारी है।

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