JJM Scam में पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल हुए गिरफ्तार ; जानें कैसे हुई 900+ करोड़ की हेरा फेरी
राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े ₹900–960 करोड़ के टेंडर घोटाले में पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल की नई दिल्ली से गिरफ्तारी ने बड़ा खुलासा किया है। ACB जांच में फर्जी प्रमाणपत्र, अनियमित टेंडर आवंटन और कई अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है।

राजस्थान के पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल
राजस्थान में जल जीवन मिशन से जुड़े बहुचर्चित बहु-करोड़ टेंडर घोटाले ने एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। राजस्थान की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल को नई दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी उस मामले में हुई है, जिसमें जल जीवन मिशन के तहत लगभग ₹900 से ₹960 करोड़ के टेंडरों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोप लगाए गए हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा मामला वर्ष 2024 में शुरू हुई विस्तृत जांच से जुड़ा है, जिसमें प्रारंभिक पड़ताल के दौरान टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं, फर्जी बिलिंग और प्रक्रियात्मक उल्लंघन के प्रमाण सामने आए थे। जांच में यह भी पाया गया कि कई निजी कंपनियों ने फर्जी पूर्णता प्रमाणपत्र (Completion Certificates) के आधार पर बड़े सरकारी ठेके हासिल किए, जिससे सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ।
इस बीच, यह भी समझना आवश्यक है कि जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission) क्या है। यह भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे वर्ष 2019 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों के हर घर तक सुरक्षित और पर्याप्त पाइप से पीने का पानी पहुंचाना है, जिसे “हर घर जल” अभियान के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। इस मिशन का लक्ष्य प्रति व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 55 लीटर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। यह योजना वर्ष 2024 से 2028 के बीच ग्रामीण भारत के हर घर तक नल से जल पहुंचाने के उद्देश्य के साथ लागू की जा रही है। इसमें समुदाय की भागीदारी, जल संरक्षण और ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार पर विशेष जोर दिया जाता है।
ACB के महानिदेशक गोविंद गुप्ता ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि सुबोध अग्रवाल के खिलाफ पहले ही गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका था। लंबे समय से फरार चल रहे अग्रवाल की तलाश में कई राज्यों में विशेष अभियान चलाया गया, जिसके बाद उन्हें नई दिल्ली से गिरफ्तार किया गया।
जांच के दौरान 17 फरवरी को ACB ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए राजस्थान के जयपुर, बाड़मेर, जालौर और सीकर सहित कुल 15 स्थानों पर छापेमारी की थी। इसके साथ ही बिहार, झारखंड और दिल्ली में भी तलाशी अभियान चलाया गया था। इसी दिन उनके आवास पर भी छापा मारा गया, जिसके बाद दस्तावेजों की गहन जांच के आधार पर कार्रवाई को और तेज किया गया और नौ पीएचईडी (PHED) अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया।
इसके बाद 18 फरवरी को सुबोध अग्रवाल के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया, क्योंकि वह लगातार फरार चल रहे थे। जांच एजेंसियों के अनुसार इस मामले में अब तक कुल 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि जिन कंपनियों जैसे गणपति ट्यूबवेल और श्याम ट्यूबवेल को टेंडर दिए गए, उन्होंने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर अनुबंध हासिल किए। आरोप है कि इन अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिसके चलते करीब ₹900 करोड़ के ठेके संदिग्ध परिस्थितियों में आवंटित कर दिए गए।
पूर्व IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल, जो उस समय राजस्थान में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान PHED में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे, इस पूरे प्रकरण में प्रमुख भूमिका में बताए जा रहे हैं। यह मामला अब केवल आर्थिक अनियमितताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जल जीवन मिशन, जिसका उद्देश्य ग्रामीण भारत के हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है, अब इस घोटाले के चलते एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गया है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह मामला और भी कई अहम खुलासों की ओर संकेत कर रहा है, जो प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गहरी छाया डालते हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
