NEET पेपर लीक में 10वीं गिरफ्तारी; CBI ने लातूर से कोचिंग मालिक प्रोफेसर शिवराज को दबोचा
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने लातूर के आरसीसी कोचिंग के मालिक प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार कर हूबहू प्रश्नपत्र बरामद किया है।

नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए लातूर के आरसीसी कोचिंग संस्थान के मालिक प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर।
CBI Action NEET 2026 : देश की सबसे बड़ी चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी 2026 की शुचिता पर लगे दाग अब और गहरे होते जा रहे हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी और सनसनीखेज कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के लातूर स्थित प्रसिद्ध आरसीसी कोचिंग संस्थान के मालिक प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी न केवल इस घोटाले की गंभीरता को दर्शाती है, बल्कि उन सफेदपोश चेहरों को भी बेनकाब करती है जो शिक्षा की आड़ में पेपर लीक के काले साम्राज्य का संचालन कर रहे थे। जांच एजेंसी द्वारा की गई यह 10वीं गिरफ्तारी है, जिसने पूरे देश के कोचिंग गलियारों में खलबली मचा दी है।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब सीबीआई की विशेष टीमों ने पिछले 24 घंटों में लातूर सहित पांच अलग-अलग ठिकानों पर सघन तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान प्रोफेसर शिवराज के आवास और संस्थान से जो मिला, उसने अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। तलाशी में रसायन विज्ञान (Chemistry) का एक ऐसा प्रश्नपत्र बरामद हुआ, जिसके प्रश्न 3 मई को आयोजित वास्तविक नीट परीक्षा के सवालों से हूबहू मेल खाते थे। प्रोफेसर शिवराज को एनटीए से जुड़े रसायन विज्ञान के व्याख्याता पी.वी. कुलकर्णी का बेहद करीबी माना जाता है, जो पहले से ही जांच के घेरे में हैं। आरोपी का नेटवर्क इतना विशाल है कि उनके संस्थान की नौ शाखाएं छात्रों को नीट की तैयारी करा रही थीं, लेकिन पर्दे के पीछे 'विशेष कक्षाओं' के नाम पर लाखों रुपयों का सौदा कर पेपर पढ़ाया जा रहा था।
कानूनी प्रक्रिया के तहत, शिक्षा मंत्रालय की शिकायत पर सीबीआई ने 12 मई 2026 को इस मामले में औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद से ही जांच की कमान संभालते हुए एजेंसी ने दिल्ली, जयपुर, गुरुग्राम और महाराष्ट्र के कई शहरों में छापेमारी कर डिजिटल साक्ष्य, लैपटॉप और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। सीबीआई की स्पेशल टीमों ने अब तक की जांच में उस वास्तविक स्रोत (Source) का भी पता लगा लिया है, जहां से परीक्षा से पहले ही रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के प्रश्नपत्र प्रसारित किए गए थे। गिरफ्तार किए गए बिचौलियों ने स्वीकार किया है कि वे छात्रों को जुटाने और मोटी रकम के बदले उन्हें लीक हुए प्रश्नपत्र मुहैया कराने का काम करते थे।
प्रोफेसर शिवराज मोटेगांवकर की गिरफ्तारी इस जांच में एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है, क्योंकि वे सीधे तौर पर छात्रों के प्रशिक्षण और परीक्षा सामग्री के प्रबंधन से जुड़े हुए थे। फिलहाल, नौ आरोपियों को पहले ही पुलिस हिरासत में भेजा जा चुका है और 10वें आरोपी यानी प्रोफेसर शिवराज को अदालत में पेश कर रिमांड की मांग की जा रही है। सीबीआई का यह कड़ा प्रहार उन लाखों ईमानदार छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए एक बड़ा संदेश है, जो वर्षों तक कड़ी मेहनत करते हैं। इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि पेपर लीक के इस संगठित अपराध के तार चाहे कितने भी ऊंचे क्यों न जुड़े हों, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुंचने के लिए तैयार हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
