कॉरपोरेट की आड़ में 'धर्मांतरण' का घिनौना खेल: 25 दिन बाद मुख्य आरोपी निदा खान छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार|
25 दिनों से फरार चल रही आरोपी निदा खान को पुलिस ने हिरासत में लिया, कोर्ट ने पहले ही खारिज कर दी थी अग्रिम जमानत याचिका।

नासिक टीसीएस महिला कर्मचारियों के जबरन धर्मांतरण मामले की मुख्य आरोपी निदा खान, जिसे पुलिस ने गुरुवार को गिरफ्तार किया।
महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की बीपीओ यूनिट में सामने आए बहुचर्चित यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के मामले में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पिछले 25 दिनों से कानून की आंखों में धूल झोंक रही मुख्य आरोपी निदा खान को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। निदा खान की गिरफ्तारी छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) से हुई है, जहाँ वह फरारी काट रही थी। नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब टीसीएस की नासिक यूनिट में काम करने वाली महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि वहां एक संगठित समूह द्वारा उनका मानसिक और शारीरिक शोषण किया जा रहा है। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि जुलाई 2022 से फरवरी 2026 के बीच कंपनी के भीतर एक ऐसा समूह सक्रिय था, जो हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करता था और महिला कर्मचारियों पर एक विशेष धर्म अपनाने का दबाव बनाता था। निदा खान पर आरोप है कि उसने महिला कर्मचारियों को इस्लामी परंपराओं के अनुसार व्यवहार करने और उनके मुताबिक कपड़े पहनने के लिए मजबूर किया।
विधिक पक्ष की बात करें तो निदा खान ने अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए नासिक कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। अपनी दलील में उसने खुद को दो माह की गर्भवती बताते हुए मानवीय आधार पर राहत मांगी थी। हालांकि, अदालत ने अपराध की गंभीरता और एसआईटी द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों को देखते हुए उसे कोई भी अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट से राहत न मिलने के बाद निदा फरार हो गई थी, जिसकी तलाश में पुलिस की कई टीमें महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों में छापेमारी कर रही थीं।
नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में अब तक कुल नौ प्राथमिकियां दर्ज की जा चुकी हैं और निदा खान सहित आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित अवैध गतिविधि थी। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की यौन उत्पीड़न और मानहानि से जुड़ी धाराओं के अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी केस दर्ज किया गया है, क्योंकि इस मामले की मुख्य शिकायतकर्ता अनुसूचित जाति से संबंधित है।
इस घटना ने कॉरपोरेट जगत में कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता के मुद्दों पर एक नई बहस छेड़ दी है। एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी के भीतर इस तरह की गतिविधियों का चलना सुरक्षा प्रोटोकॉल पर भी सवाल खड़े करता है। निदा खान की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में कई और अहम खुलासे होंगे, जिससे इस संगठित गिरोह की पूरी कार्यप्रणाली और इसके पीछे छिपे अन्य चेहरों का पर्दाफाश हो सकेगा। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून के उल्लंघन और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
