नाशिक TCS कांड में आरोपी रज़ामेमन और शफी शेख हुए गिरफ्तार ; HR निदा खान की तलाश जारी
नासिक TCS केस में यौन उत्पीड़न, जबरन धार्मिक दबाव और संगठित शोषण के आरोपों ने बड़ा खुलासा किया। 7 आरोपियों की गिरफ्तारी, 9 एफआईआर दर्ज, और पीओएसएच अधिकारी पर कार्रवाई ने कॉर्पोरेट सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

नासिक पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए TCS आरोपी
नासिक के एक प्रतिष्ठित आईटी संस्थान से सामने आया यह मामला अब एक बड़े कॉर्पोरेट संकट का रूप ले चुका है, जहां कार्यस्थल की सुरक्षा और नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अप्रैल 2026 की शुरुआत में एक महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों ने धीरे-धीरे एक ऐसे जाल का खुलासा किया, जिसने पूरे संगठन को झकझोर कर रख दिया।
घटना की शुरुआत तब हुई जब एक महिला कर्मचारी ने अपने सहकर्मियों पर यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया। शुरुआती शिकायत के बाद जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई अन्य महिला कर्मचारियों ने भी सामने आकर समान आरोप लगाए। इन आरोपों में अश्लील टिप्पणियां, शारीरिक उत्पीड़न, डराने-धमकाने की घटनाएं और कथित तौर पर धार्मिक आचरण के लिए दबाव डालने जैसी गंभीर बातें शामिल थीं।
#WATCH | Nashik, Maharashtra | Accused Raza Memon and Shafi Sheikh, arrested in connection with the Nashik TCS alleged religious conversion and sexual harassment case, are being produced in court. pic.twitter.com/YTwuppvChs
— ANI (@ANI) April 16, 2026
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने करीब 9 एफआईआर दर्ज कीं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई एकल घटना नहीं बल्कि एक व्यापक और संगठित समस्या हो सकती है। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कथित रूप से आर्थिक रूप से कमजोर कर्मचारियों को निशाना बनाते थे, जिससे शोषण की आशंका और गहरी हो गई।
जांच के दौरान पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें रजा मेमन, शफी शेख, आसिफ अंसारी, दानिश, शाहरुख कुरैशी और तौसीफ अत्तार शामिल हैं। इसके अलावा, पीओएसएच (यौन उत्पीड़न रोकथाम) समिति के ऑपरेशंस मैनेजर अश्विन चैनानी को भी गिरफ्तार किया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पीड़ितों की शिकायतों को नजरअंदाज किया और उचित कार्रवाई नहीं की। वहीं, एचआर मैनेजर निदा खान फिलहाल फरार बताई जा रही हैं।
पुलिस ने इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए न्यायमूर्ति आर.सी. नरवाडिया की अदालत में आरोपियों की न्यायिक हिरासत की मांग की है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी एक संगठित समूह के रूप में काम कर रहे थे, जो व्यवस्थित तरीके से महिलाओं को निशाना बना रहे थे।
कंपनी ने इस पूरे मामले पर कार्रवाई करते हुए आरोपियों को निलंबित कर दिया है और आंतरिक जांच शुरू कर दी है। हालांकि, यह मामला अब केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा, कॉर्पोरेट जवाबदेही और शिकायत निवारण तंत्र की प्रभावशीलता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर उभरा है।
जांच अभी जारी है और संभावना है कि आने वाले दिनों में और भी खुलासे तथा गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह मामला न केवल पीड़ितों के लिए न्याय की लड़ाई है, बल्कि पूरे कॉर्पोरेट ढांचे के लिए एक चेतावनी भी है कि कार्यस्थल की सुरक्षा और गरिमा से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
