क्या हुआ?

बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में रायगढ़ ज़िले के एक निजी स्कूल में कार्यरत प्रोबेशनरी असिस्टेंट टीचर की सेवा समाप्ति को सही ठहराया। शिक्षक पर आरोप था कि उसने छात्रों को “रोमांटिक” व्हाट्सऐप संदेश भेजे थे, जिसके बाद स्कूल प्रबंधन ने ज़ीरो-टॉलरेंस नीति अपनाते हुए उसे नौकरी से हटा दिया था। कोर्ट ने शिक्षक को बहाल करने से इनकार कर दिया और कहा कि क्लासरूम के बाहर छात्रों से इस तरह का संपर्क अनुचित है और सेवा समाप्ति का पर्याप्त आधार बनता है।


शिक्षक की नियुक्ति और पृष्ठभूमि:

पुलिस या आपराधिक मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई का मामला:

  • शिक्षक की नियुक्ति: 29 फ़रवरी 2020
  • पद: प्रोबेशनरी असिस्टेंट टीचर
  • स्कूल: निजी स्कूल, रायगढ़ ज़िला
  • सेवा समाप्ति: 2023 की शुरुआत में


घटना की सूचना:

मामले की शुरुआत तब हुई जब छात्रों के माता-पिता ने स्कूल प्रबंधन से औपचारिक शिकायतें दर्ज कराईं। शिकायतों में आरोप लगाया गया कि शिक्षक स्कूल समय के बाहर छात्रों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर रहा था। इसके बाद स्कूल ने आंतरिक स्तर पर मामला देखा और शिक्षक की प्रोबेशनरी सेवा समाप्त कर दी।


कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं:

शिक्षक की ओर से तर्क दिया गया कि:

  • उसे बिना पूर्ण विभागीय जांच के हटाया गया
  • संदेशों की वास्तविक सामग्री की जांच नहीं की गई

वहीं, स्कूल प्रबंधन ने कहा:

  • छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि है
  • प्रोबेशनरी कर्मचारी पर कठोर मानक लागू होते हैं
  • इस तरह का आचरण संस्थान की नीति के खिलाफ है


बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला:

हाई कोर्ट ने स्कूल प्रबंधन के फैसले को सही ठहराते हुए कहा:

  • प्रोबेशनरी शिक्षक की सेवाएं समाप्त करने का अधिकार प्रबंधन को है
  • छात्रों से स्कूल के बाहर निजी संपर्क गंभीर चिंता का विषय है
  • संदेशों की सामग्री की विस्तृत जांच आवश्यक नहीं
  • ज़ीरो-टॉलरेंस नीति अपनाना पूरी तरह जायज़


कानूनी स्थिति — क्या नहीं किया गया:

  • शिक्षक को बहाल नहीं किया गया
  • सेवा समाप्ति पर कोई रोक (स्टे) नहीं लगाई गई
  • स्कूल के फैसले में कोई हस्तक्षेप नहीं


मुख्य बिंदु एक नज़र में:

  • मामला: शिक्षक–छात्र व्हाट्सऐप संदेश विवाद
  • कोर्ट: बॉम्बे हाई कोर्ट
  • स्थान: रायगढ़ ज़िला, महाराष्ट्र
  • शिक्षक की स्थिति: प्रोबेशनरी
  • फैसला: सेवा समाप्ति सही ठहराई
  • कारण: स्कूल के बाहर अनुचित संपर्क


आगे क्या?

यह फैसला निजी स्कूलों में कार्यरत प्रोबेशनरी शिक्षकों के लिए एक अहम मिसाल माना जा रहा है, खासकर छात्र सुरक्षा और पेशेवर आचरण से जुड़े मामलों में।



Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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