सावधान! कहीं आपका अगला क्लिक न कर दे कंगाल: मुंबई की इस नर्स के साथ जो हुआ, उसे जानकर आप भी ऑनलाइन शॉपिंग से डरने लगेंगे।
फेसबुक पर मात्र 299 रुपये की ड्रेस का विज्ञापन देख ऑर्डर करना महिला को पड़ा महंगा, ठगों ने पांच दिनों में वसूले पैसे।

मुंबई में साइबर अपराधियों ने ऑनलाइन शॉपिंग के नाम पर एक नर्स के बैंक खाते से एक लाख रुपये की धोखाधड़ी की।
मुंबई में साइबर ठगी का सनसनीखेज मामला: 299 रुपये की ड्रेस के फेर में नर्स ने गंवाए एक लाख रुपये
डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां तकनीक ने हमारे जीवन को सुलभ बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने मासूम नागरिकों को लूटने के लिए वर्चुअल दुनिया में जाल बिछाना शुरू कर दिया है। मायानगरी मुंबई से एक ऐसा ही मामला सामने आया है जिसने ऑनलाइन शॉपिंग के सुरक्षित होने के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंबई के देवनार इलाके में रहने वाली एक निजी अस्पताल की नर्स एक साधारण फेसबुक विज्ञापन के झांसे में आकर अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई से हाथ धो बैठीं। जिस ड्रेस की कीमत मात्र 299 रुपये दिखाई गई थी, उसे पाने की कोशिश में ठगों ने नर्स के बैंक खाते से एक लाख रुपये की भारी भरकम राशि पार कर दी।
घटना की शुरुआत तब हुई जब पीड़िता ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक आकर्षक विज्ञापन देखा। इस विज्ञापन में डिज़ाइनर ड्रेसेस को बेहद कम दामों पर बेचने का दावा किया गया था। हॉस्टल में रहने वाली और अस्पताल की व्यस्त दिनचर्या के बीच अपनी जरूरतों के लिए ऑनलाइन माध्यम पर निर्भर रहने वाली नर्स के लिए यह ऑफर काफी लुभावना था। उन्होंने बिना किसी संदेह के विज्ञापन में दिए गए लिंक पर क्लिक किया और एक ड्रेस ऑर्डर करने की प्रक्रिया शुरू की। उन्हें इस बात का रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि यह वेबसाइट अपराधियों द्वारा केवल डेटा और पैसे चोरी करने के लिए बनाई गई एक 'फिशिंग' साइट थी।
ठगी का तरीका इतना शातिर था कि पीड़िता को पांच दिनों तक इस बात का एहसास ही नहीं हुआ कि वह किसी गिरोह के चंगुल में फंस चुकी हैं। ऑर्डर करने के तुरंत बाद उनके पास एक कथित डिलीवरी एजेंट का फोन आया। जालसाजों ने तकनीकी शब्दावली का सहारा लेकर उन्हें उलझाना शुरू किया। शुरुआत में ड्रेस की शिपिंग के नाम पर छोटी राशि मांगी गई, जिसे पीड़िता ने आसानी से जमा कर दिया। इसके बाद अपराधियों ने 'जीपीएस ट्रैकिंग सक्रिय' करने, 'एड्रेस वेरिफिकेशन' और 'रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट' के नाम पर बार-बार पैसे मांगे। ठगों ने नर्स को यह भरोसा दिलाया कि ड्रेस की सफल डिलीवरी के बाद यह पूरी राशि उनके खाते में स्वतः वापस आ जाएगी। 16 अप्रैल से 20 अप्रैल के बीच, नर्स ने अलग-अलग किस्तों में कुल एक लाख रुपये उन बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिए जो फर्जी दस्तावेजों पर संचालित थे।
जब पांच दिन बीत जाने के बाद भी न तो पार्सल पहुंचा और न ही सुरक्षा राशि वापस आई, तब नर्स ने उन नंबरों पर संपर्क करने का प्रयास किया, जो अब बंद हो चुके थे। अपनी बड़ी आर्थिक क्षति का बोध होते ही पीड़िता ने तत्काल साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल किया। देवनार पुलिस स्टेशन में मामले की आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत अज्ञात जालसाजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह गिरोह किसी दूसरे राज्य से संगठित रूप से काम कर रहा है और फर्जी सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए बड़े पैमाने पर लोगों को निशाना बना रहा है।
यह घटना उन सभी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए एक चेतावनी है जो अक्सर 'अविश्वसनीय' सस्ते ऑफर्स की ओर आकर्षित होते हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट मत है कि कोई भी वैध ई-कॉमर्स कंपनी रिफंड या वेरिफिकेशन के नाम पर ग्राहकों से अग्रिम भुगतान की मांग नहीं करती है। इस मामले का सबसे दुखद पहलू यह है कि एक स्वास्थ्यकर्मी, जो दिन-रात समाज की सेवा में जुटी रहती है, को साइबर अपराधियों ने अपनी चालाकी का शिकार बना लिया। यह मामला न केवल वित्तीय धोखाधड़ी की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि डिजिटल साक्षरता और सतर्कता की तत्काल आवश्यकता पर भी जोर देता है ताकि भविष्य में किसी अन्य की मेहनत की कमाई इस तरह न लुटे।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
