इंफाल: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में जातीय और सामुदायिक संघर्ष के बीच एक बार फिर बेहद संवेदनशील और तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है। राज्य के कांगपोकपी जिले से करीब 28 दिन पहले कथित रूप से अगवा किए गए नागा समुदाय के छह पुरुषों के शव सुरक्षा बलों ने एक सघन वन क्षेत्र से बरामद कर लिए हैं। इस दर्दनाक घटना की पुष्टि के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और गहरे आक्रोश की लहर दौड़ गई है। पीड़ित परिवारों और नागा सामाजिक संगठनों में इस वारदात को लेकर भारी नाराजगी है। शवों की बरामदगी के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इंफाल स्थित जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान (जेएनआईएमएस) के शवगृह में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, जहां वर्तमान में सभी शवों को पहचान और अन्य प्रक्रियाओं के लिए रखा गया है।

इस बड़े सर्च ऑपरेशन के विवरण साझा करते हुए मणिपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि लापता नागरिकों का पता लगाने के लिए एक अत्यंत व्यापक और संयुक्त अभियान चलाया गया था। इस अभियान में मणिपुर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और असम राइफल्स के लगभग 450 जवानों की एक विशाल टीम शामिल थी। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में तलाशी के लिए खोजी कुत्तों और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद भी ली गई। लगभग 24 घंटे तक चले निरंतर और सघन तलाशी अभियान के बाद, कांगपोकपी जिले के सैतु-गाम्फाजोल उपमंडल के अंतर्गत आने वाले खारम वैफेई गांव के समीप एक घने वन क्षेत्र से इन छह लापता लोगों के शव बरामद किए गए। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, ये सभी मृतक गत 13 मई को लेइलोन वाइफेई गांव से हथियारों के बल पर बंधक बनाए गए लोगों में शामिल थे।

इस घटना के बाद नागा समुदाय के शीर्ष संगठनों ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। लियांगमाई नागा काउंसिल मणिपुर के अध्यक्ष टिमोथी विजुनामाई ने बेहद कड़े शब्दों में अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि लापता नागरिकों के शवों को ढूंढकर इंफाल लाने में प्रशासन को 28 दिन लग गए, जो कि सरकारी तंत्र की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि काउंसिल और पीड़ित परिवार सबसे पहले चिकित्सकीय और कानूनी रूप से शवों की पूर्ण पहचान स्थापित करेंगे। इसके उपरांत ही पीड़ित परिवारों और समुदाय के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक कर आगे की रणनीति और ठोस कार्रवाई पर कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

इस जघन्य हत्याकांड के विरोध में नागा समुदाय की सबसे प्रतिष्ठित और शीर्ष संस्था यूनाइटेड नागा काउंसिल (यूएनसी) ने अत्यंत कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। यूएनसी ने इस घटना को मानवाधिकारों और मानवीय गरिमा का घोर उल्लंघन बताते हुए राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। यह 24 घंटे का पूर्ण शटडाउन घोषित किया गया है। आदिवासी संगठन ने साफ शब्दों में घोषणा की है कि जब तक उनकी चार सूत्रीय न्यायसंगत मांगों को पूरा नहीं किया जाता और मणिपुर सरकार तथा केंद्र सरकार द्वारा पीड़ित परिवारों को पूर्ण न्याय का भरोसा नहीं दिया जाता, तब तक वे छह नागा मृतकों के पार्थिव शरीरों को स्वीकार नहीं करेंगे। यूएनसी के सूचना और प्रचार सचिव एच. जेम्स हौ ने कहा कि क्षत-विक्षत हालत में शवों का मिलना समाज की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है, जिसने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सरकारी क्षमता पर से जनता का भरोसा पूरी तरह हिला दिया है।

इस दुखद घटना पर राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के शीर्ष राजनेताओं ने भी अपनी गहरी संवेदनाएं और चिंता प्रकट की है। नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने इस वारदात की तीव्र निंदा करते हुए इसे पूरी तरह से अमानवीय और अस्वीकार्य कृत्य करार दिया है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से दोषियों को तत्काल चिन्हित कर न्याय के कटघरे में खड़ा करने की मांग की है। वहीं, मणिपुर की उप-मुख्यमंत्री नेमचा किपजेन ने भी इस घटना को समाज पर एक गहरा धब्बा बताते हुए सभी समुदायों से शांति, आपसी समझ और करुणा बनाए रखने की अपील की है ताकि राज्य में भय और नफरत के इस चक्र को हमेशा के लिए समाप्त किया जा सके।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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