KGMU धर्मांतरण कांड: इलाज के मंदिर में 'मजहबी' खेल? STF की एंट्री के बाद रडार पर कई सफेदपोश चेहरे
लखनऊ के KGMU धर्मांतरण मामले में UP STF की एंट्री! 50 हजार का इनामी डॉक्टर रमीज गिरफ्तार, PFI कनेक्शन और विदेशी लिंक की जांच शुरू। क्या मेडिकल कॉलेज की आड़ में चल रहा था धर्मांतरण का बड़ा रैकेट? जानिए लव जिहाद, यौन शोषण और रेडिकलाइजेशन के इस गंभीर मामले की पूरी सच्चाई और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देश।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित देश के विख्यात किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के गलियारों में इन दिनों मरीजों की भीड़ से ज्यादा पुलिस और जांच एजेंसियों की हलचल है। 'इलाज का मंदिर' कहे जाने वाले इस संस्थान में सामने आए कथित जबरन धर्मांतरण और यौन शोषण के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद अब इस केस की कमान उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने संभाल ली है, जिससे उन रसूखदारों की नींद उड़ गई है जो अब तक पर्दे के पीछे रहकर इस कथित नेटवर्क को खाद-पानी दे रहे थे।
मुख्य घटनाक्रम: प्यार, प्रताड़ना और परिवर्तन का 'जाल'
इस सनसनीखेज मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने पैथोलॉजी विभाग के जूनियर रेजिडेंट डॉ. रमीज मलिक पर शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने और फिर इस्लाम स्वीकार करने के लिए अमानवीय मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया। पीड़िता की शिकायत के अनुसार, उस पर धर्म परिवर्तन के लिए इतना दबाव बनाया गया कि उसने तंग आकर आत्महत्या का प्रयास तक किया।
- इनामी डॉक्टर की गिरफ्तारी: पुलिस ने मुख्य आरोपी डॉ. रमीज मलिक को 50 हजार रुपये का इनाम घोषित होने के बाद भगोड़ा घोषित किया था। अंततः 16 दिनों की लुका-छिपी के बाद उसे लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया गया है।
- संगठित नेटवर्क का शक: जांच में सामने आया है कि यह मामला केवल एक डॉक्टर तक सीमित नहीं है। डॉ. रमीज के मोबाइल डेटा और पूछताछ से संकेत मिले हैं कि संस्थान के भीतर कुछ अन्य डॉक्टर और महिला स्टाफ भी इस 'रेडिकलाइजेशन' की प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।
- PFI और बाहरी कनेक्शन: प्रारंभिक जांच में आरोपी के प्रतिबंधित संगठन PFI से संभावित संबंधों और कुछ संदिग्ध 'मेडिकोस ग्रुप' के साथ जुड़ाव की बात सामने आई है, जिसकी अब एटीएस (ATS) भी गहनता से पड़ताल कर रही है।
आधिकारिक कार्रवाई और प्रशासनिक पक्ष
मामले की गंभीरता को देखते हुए KGMU प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार ने कई कड़े कदम उठाए हैं:
- STF को कमान: कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर सात सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट सौंपी। इसके तुरंत बाद मामले की गंभीरता और विदेशी लिंक की संभावना को देखते हुए जांच STF को सौंप दी गई।
- निलंबन और निष्कासन: आरोपी डॉ. रमीज को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, पैथोलॉजी विभाग के डॉ. वाहिद अली, जिन पर विभाग में विवादित तकरीरें और रेडिकलाइजेशन को बढ़ावा देने का आरोप था, उन्हें भी पद से हटा दिया गया है।
- विशाखा कमेटी की रिपोर्ट: विशाखा कमेटी ने कैंपस के भीतर यौन उत्पीड़न और मनोवैज्ञानिक दबाव की पुष्टि की है, जिसे अब पुलिस चार्जशीट का हिस्सा बनाया जाएगा।
साख पर संकट और सुरक्षा की चुनौती
KGMU का यह धर्मांतरण मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह उन हजारों छात्रों और डॉक्टरों के भरोसे पर प्रहार है जो यहाँ सेवा भाव से आते हैं। यदि मेडिकल प्रोफेशन जैसे पवित्र पेशे की आड़ में इस तरह का 'धर्मांतरण रैकेट' चल रहा था, तो यह आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा अलार्म है। अब सबकी निगाहें STF की उस अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस 'सफेदपोश सिंडिकेट' की हर परत को बेनकाब करेगी।

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