कानपुर में साइबर ठगी से हड़कंप, 272 लोगों से ₹100 करोड़ की लूट
साइबर अपराधियों ने म्यूल खातों के जरिए ठगी को अंजाम दिया, जबकि पुलिस महज दो फीसदी रकम ही फ्रीज करा सकी है।

कानपुर में साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच डिजिटल धोखाधड़ी को दर्शाती सांकेतिक तस्वीर।
कानपुर में साइबर ठगों का नेटवर्क लगातार लोगों की मेहनत की कमाई पर सेंध लगा रहा है। पुलिस, साइबर सेल और सरकारी व गैर सरकारी संगठनों की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद साइबर ठगी के मामलों में कमी नहीं आ रही है। बैंकों की लापरवाही और जवाबदेही के अभाव का साइबर अपराधी पूरा फायदा उठा रहे हैं। शहर में हर दिन औसतन 33.15 लाख रुपये की डिजिटल डकैती हो रही है।
इस वर्ष जनवरी से 20 अक्तूबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, कानपुर में 272 लोगों से कुल 100 करोड़ 09 लाख 24 हजार 055 रुपये की साइबर ठगी की जा चुकी है। पुलिस और साइबर सेल ने कार्रवाई करते हुए अब तक 151 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। हालांकि, चारों जोन की साइबर सेल ठगी की रकम में से केवल दो करोड़ 20 लाख 40 हजार 567 रुपये ही फ्रीज करा सकी हैं। यह राशि कुल ठगी का महज दो फीसदी है।
अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से बैंकों को जवाबदेह बनाने के संबंध में दिए गए आदेश के बाद साइबर ठगी के शिकार लोगों को अपनी रकम वापस मिलने की उम्मीद बढ़ जाएगी। बैंकिंग व्यवस्था में जवाबदेही तय होने से पीड़ितों को राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
साइबर अपराधियों के लिए ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में पहुंचाने और खपाने के लिए बैंक खातों की जरूरत होती है। इसके लिए अपराधी म्यूल खातों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खाते बेरोजगारों, छात्रों, ग्रामीणों और जरूरतमंद लोगों को लालच देकर खुलवाए जाते हैं। खाते खुलवाने के बाद अपराधी संबंधित लोगों से एटीएम कार्ड, पासबुक और चेकबुक भी अपने कब्जे में ले लेते हैं। साइबर ठगी की जांच में कई बार यह तथ्य सामने आया है कि अपराधी बैंक खातों को किराये पर भी लेते हैं।
साइबर सेल के एक अधिकारी के मुताबिक, ठगी की रकम के लेनदेन से जुड़े प्रथम और द्वितीय स्तर के खातों को फ्रीज कराया जाता है। जनवरी 2025 से अक्तूबर 2026 तक कुल 5459 बैंक खाते फ्रीज कराए जा चुके हैं। इसके बावजूद ठगी की कुल रकम के मुकाबले फ्रीज कराई गई राशि का आंकड़ा बेहद कम है।
डिजिटल अरेस्ट के मामलों में इस वर्ष कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में डिजिटल अरेस्ट के 17 से अधिक मामले सामने आए थे, जबकि जागरूकता अभियान के चलते इस वर्ष जनवरी से अब तक ऐसे सात मामले सामने आए हैं। इन मामलों में 13 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
वर्ष 2026 में अब तक साइबर ठगी के 272 मामले दर्ज किए गए हैं। आंकड़े बताते हैं कि लगातार कार्रवाई और जागरूकता अभियानों के बावजूद साइबर अपराधियों की चुनौती बनी हुई है। वहीं, ठगी की रकम का महज दो फीसदी फ्रीज हो पाना पीड़ितों की धनराशि वापस दिलाने और बैंकिंग व्यवस्था की जवाबदेही सुनिश्चित करने की चुनौती को सामने रखता है।

Pratahkal Bureau
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