"मेरी लाश पापा को छूने भी न दिया जाए.." प्रियांशु के सुसाइड नोट ने सबको चौंकाया, जानें आत्महत्या की वजह
कानपुर जिला न्यायालय में प्रशिक्षु वकील प्रियांशु श्रीवास्तव ने आत्महत्या कर ली। व्हाट्सऐप पर छोड़े गए सुसाइड नोट में उन्होंने बचपन की दर्दनाक घटनाओं और मानसिक प्रताड़ना का उल्लेख किया। घटना ने कानूनी समुदाय और समाज में मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

कानपुर में कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले प्रशिक्षु वकील प्रियांशु श्रीवास्तव
कानपुर जिला न्यायालय परिसर में उस समय सनसनी फैल गई जब एक प्रशिक्षु वकील प्रियांशु श्रीवास्तव ने कथित रूप से न्यायालय की पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना न केवल कानूनी जगत को स्तब्ध कर गई, बल्कि पूरे शहर में गहरे सदमे और चर्चा का विषय बन गई है।
जानकारी के अनुसार, 23 वर्ष के प्रियांशु श्रीवास्तव ने आत्महत्या से पहले अपने व्हाट्सऐप स्टेटस पर एक विस्तृत सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उन्होंने अपने पिता के कथित अत्यधिक सख्त व्यवहार, मानसिक उत्पीड़न और बचपन के दर्दनाक अनुभवों का उल्लेख किया। नोट में उन्होंने लिखा कि वर्षों से चली आ रही भावनात्मक और शारीरिक प्रताड़ना ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया था।
“Don’t even let my father touch my body… you won… congratulations on your victory, Papa.”
— Bhadohi Wallah (@Mithileshdhar) April 24, 2026
A trainee lawyer, Priyanshu Srivastava, died by suicide after jumping from the fifth floor of the court building. The incident took place in the court premises of Kanpur, Uttar Pradesh.… pic.twitter.com/h9yzGYxPm5
सुसाइड नोट में प्रियांशु ने अपने पिता के अनुशासन और व्यवहार को लेकर गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा कि उनके बचपन के अनुभव आज भी उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित करते हैं। उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जिसमें छह वर्ष की आयु में बिना पूछे फ्रिज से मैंगो शेक पीने पर उन्हें घर से बाहर निकालकर अपमानित किया गया था। उन्होंने लिखा कि माता-पिता का सख्त होना समझ में आता है, लेकिन इस हद तक नहीं कि बच्चे का जीवन ही बोझ बन जाए।
उन्होंने अपने नोट में यह भी लिखा कि उन्हें छोटी-छोटी बातों पर लगातार सवाल-जवाब और तानों का सामना करना पड़ता था, जिससे वे लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। भावनात्मक रूप से टूटे हुए प्रियांशु ने लिखा कि अब वह इस स्थिति को और सहन नहीं कर सकते। सुसाइड नोट के एक भावुक हिस्से में उन्होंने लिखा, “मेरे पापा ने जीत हासिल कर ली… बधाई हो पापा, आपकी जीत हुई।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, “मेरे शरीर को मेरे पिता को छूने भी न दिया जाए।” उन्होंने अपने नोट को अंत तक पढ़ने की अपील करते हुए दो पन्नों का विस्तृत संदेश छोड़ा।
घटना के बाद न्यायालय परिसर में मौजूद सीसीटीवी फुटेज में उन्हें घटना से कुछ समय पहले परिसर में घूमते हुए देखा गया है। पुलिस ने सुसाइड नोट और डिजिटल सबूतों को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक स्तर पर मामले को आत्महत्या मानते हुए जांच की जा रही है, हालांकि सभी पहलुओं की गहन पड़ताल जारी है।
इस घटना ने कानपुर के कानूनी समुदाय को झकझोर कर रख दिया है, जहां न्यायालय परिसर जैसे स्थान पर इस तरह की घटना ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। समाज में पारिवारिक दबाव, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक उत्पीड़न जैसे मुद्दों पर एक बार फिर व्यापक बहस शुरू हो गई है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस मामले में पारिवारिक तनाव के अलावा कोई अन्य कारण भी जिम्मेदार हो सकता है। फिलहाल पुलिस सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों का विश्लेषण कर रही है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
