जनकपुरी स्कूल रेप केस में बड़ा मोड़ ; जानें क्यों 3 साल की बच्ची के आरोपी केयरटेकर को कोर्ट ने दी जमानत
दिल्ली के जनकपुरी में तीन साल की बच्ची से स्कूल परिसर में हुई कथित दरिंदगी के मामले में आरोपी केयरटेकर को कोर्ट से जमानत मिल गई है। मेडिकल रिपोर्ट में चोट के निशान न मिलने और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मिली इस राहत ने पुलिस की जांच और मासूमों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

जनकपुरी स्कूल केस
देश की राजधानी दिल्ली के जनकपुरी इलाके से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर मासूमों की सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं पर नई बहस छेड़ दी है। एक निजी स्कूल में नर्सरी की तीन वर्षीय छात्रा के साथ कथित तौर पर हुई यौन प्रताड़ना के मामले में द्वारका कोर्ट ने 57 वर्षीय मुख्य आरोपी केयरटेकर को जमानत दे दी है। यह फैसला उस वक्त आया है जब पीड़ित परिवार और राजनीतिक गलियारे से दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार किए जा रहे हैं।
इस घटना की शुरुआत 30 अप्रैल 2026 को हुई थी, जब बच्ची स्कूल में अपने दाखिले के दूसरे ही दिन घर लौटी और उसने असहनीय दर्द की शिकायत की। मां द्वारा प्यार से पूछे जाने पर मासूम ने अपनी तुतलाई आवाज में जो दास्तां सुनाई, उसने परिवार के पैरों तले जमीन खिसका दी। बच्ची ने आरोप लगाया कि स्कूल के केयरटेकर ने उसे परिसर के एक सुनसान हिस्से में ले जाकर उसके साथ दरिंदगी की। शिकायत मिलने के तुरंत बाद पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(1) और पोक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को 1 मई को गिरफ्तार कर लिया था।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध किया, लेकिन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रोहित गुलिया ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को राहत प्रदान की। अदालत ने अपने आदेश में मुख्य रूप से सीसीटीवी फुटेज का उल्लेख किया, जिसमें आरोपी कथित घटना वाले दिन सुबह 8:37 बजे ही स्कूल के जूनियर विंग से बाहर निकलता दिखाई दे रहा है और फिर वापस नहीं लौटा। इसके अतिरिक्त, मेडिकल रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर किसी भी बाहरी या आंतरिक चोट या निशान का न होना भी बचाव पक्ष के हक में गया। अदालत ने यह भी माना कि आरोपी पिछले 30 वर्षों से उसी स्कूल में कार्यरत था और उसका पिछला रिकॉर्ड बेदाग रहा है।
इस कानूनी राहत ने पीड़ित मां के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। मां का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की और उन्हें घंटों थाने में बिठाए रखा गया। उन्होंने इस घृणित अपराध में एक शिक्षक की संलिप्तता का भी अंदेशा जताया है। इस मामले ने राजनीतिक तूल तब पकड़ा जब आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने इसे दिल्ली की कानून व्यवस्था की विफलता करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी दिल्ली के डीसीपी ने पीड़ित परिवार को डराने-धमकाने की कोशिश की है।
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि जांच पूरी तरह से पेशेवर और वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित रही है। पुलिस के अनुसार, सीसीटीवी डीवीआर जब्त कर लिए गए हैं और बच्ची की पहचान के तुरंत बाद ही गिरफ्तारी की गई थी। फिलहाल, अदालत ने आरोपी को ट्रायल खत्म होने तक स्कूल परिसर से दूर रहने का आदेश दिया है, जबकि दिल्ली पुलिस अब इस जमानत आदेश के खिलाफ कानूनी विकल्पों और ऊपरी अदालत का रुख करने पर विचार कर रही है। यह मामला न केवल एक मासूम के बचपन को कुचलने की कहानी है, बल्कि यह सुरक्षा तंत्र की उन दरारों को भी उजागर करता है जहाँ न्याय की उम्मीद और कानूनी तकनीकी बारीकियों के बीच एक खाई नजर आती है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
