पीड़िता की लड़ाई में रक्षक बने भक्षक ; कानून के हाथों में रिश्वत की बागडोर
यह मामला लखनऊ पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और अधिकारियों की मिलीभगत को उजागर करता है, जिसमें गैंगरेप पीड़िता के केस में रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए सब-इंस्पेक्टर धनंजय सिंह की गिरफ्तारी ने न्याय प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।

सुब इंस्पेक्टर धनञ्जय सिंह
लखनऊ में पुलिस विभाग की साख को धक्का पहुंचाने वाला एक भ्रष्टाचार मामला सामने आया है, जिसमें पेपरमिल चौकी के इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर धनंजय सिंह को एंटी करप्शन टीम ने ₹2 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह रिश्वत एक गैंगरेप केस से जुड़ी है, जिसमें दुष्कर्म की पीड़िता ने कोचिंग संचालक प्रतीक गुप्ता समेत कुछ अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। आरोप है कि यह गैंगरेप लगभग डेढ़ साल पहले हुआ था, जिसमें पीड़िता को नशीला पदार्थ पिलाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। जब मामला दर्ज हुआ, तो पुलिस जांच के दौरान आरोपी प्रतीक गुप्ता के नाम को हटाने के लिए दरोगा धनंजय सिंह ने ₹50 लाख की भारी रिश्वत की मांग की। बाद में यह मांग ₹2 लाख तक कम होकर इस रकम के लिए सौदा तय हुआ, जिसे स्वीकार करते समय एंटी करप्शन टीम ने धनंजय सिंह को गिरफ्तार कर लिया।
गजब घूसखोरी !
— Priya singh (@priyarajputlive) October 30, 2025
दरोगा जी ने पैसे को हाथ तक नहीं लगाया। फाइल में गड्डी रख साइड कर दी. ये लखनऊ महानगर कोतवाली में तैनात चौकी इंचार्ज धनंजय सिंह हैं. इन्हें ही कल एंटी करप्शन टीम ने लखनऊ में रंगे हाथों गिरफ्तार किया है. pic.twitter.com/ODFvDrdOR8
यह मामला गंभीर आरोपों और जटिलताओं से भरा है। पीड़िता ने अपने बयान में कहा है कि उसे जबरन शराब पीने पर मजबूर किया गया और आरोपियों ने उसके साथ होटल और ऑफिस में शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद, जब उसने अपने कीमती जेवर वापस मांगे, तो उसे धमकाया गया और बंधक बनाकर अपमानित किया गया। हालांकि, पीड़िता के बयान में विरोधाभास पाए गए हैं और मेडिकल जांच में चोट के कोई स्पष्ट सबूत नहीं मिले, जिससे जांचकर्ताओं के लिए मामले की सच्चाई तय करना कठिन हो गया है। आरोपियों का कहना है कि पीड़िता उनके साथ पहले से जान-पहचान रखती है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने लखनऊ पुलिस विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सब-इंस्पेक्टर धनंजय सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है, और जांच जारी है कि इस मामले में और कौन-कौन अधिकारी या लोग शामिल हैं। यह घटना न केवल सार्वजनिक विश्वास को हिला देने वाली है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने वाली सरकारी एजेंसियों की सक्रियता का भी संकेत देती है।
यह मामले में पुलिस विभाग की छवि को भारी नुकसान पहुंचाने वाला और न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर पड़ताल की आवश्यकता वाला मामला है, जिसमें पीड़ित को न्याय दिलाना प्राथमिकता होनी चाहिए। आरोपी अधिकारी की गिरफ्तारी से यह उम्मीद की जा रही है कि भ्रष्टाचार और पुलिस अधिकारियों की मिन्नतखोरी पर अंकुश लगेगा और न्याय के रास्ते साफ होंगे।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
