चंडीगढ़: डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर पैरोल मिल गई है। साध्वियों से दुष्कर्म और पत्रकार की हत्या के गंभीर मामलों में जेल की सजा काट रहे विवादित डेरा प्रमुख को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेशों तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बाद जेल से रिहा किया गया है। स्थानीय प्रशासन और कारागार विभाग ने सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे कड़ी सुरक्षा के बीच जेल परिसर से बाहर भेजा। जेल प्रशासन के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पैरोल की अवधि समाप्त होने के बाद डेरा प्रमुख को निर्धारित तिथि पर वापस जेल बैरक में आत्मसमर्पण करना होगा।

प्रशासनिक आदेशों के तहत डेरा सच्चा सौदा प्रमुख को इस बार कुल तीस दिनों की पैरोल प्रदान की गई है। इस दौरान वह हरियाणा के सिरसा स्थित अपने मुख्य मुख्यालय और आश्रम में पुलिस की कड़ी निगरानी में रहेगा। कारागार अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय पुलिस बल के एक बड़े काफिले को उसकी सुरक्षा और आवाजाही की निगरानी में तैनात किया गया है। सुबह तड़के कानूनी दस्तावेज तैयार होने के बाद उसे रोहतक की सुनारिया जेल से सीधे सिरसा के लिए विदा किया गया। यह इस चालू वर्ष में दूसरी बार है जब राज्य सरकार और संबंधित कानूनी प्राधिकारियों द्वारा उसे पैरोल पर रिहा करने की अनुमति दी गई है। इससे पहले वर्ष के शुरुआती महीने जनवरी में भी उसे चालीस दिनों की पैरोल स्वीकृत की गई थी।

सजायाफ्ता गुरमीत राम रहीम सिंह को मिलने वाली इस पैरोल ने कानूनी और सामाजिक हलकों में एक बार फिर बहस छेड़ दी है, क्योंकि वर्ष 2020 से लेकर अब तक उसे कुल सोलह बार पैरोल अथवा फरलो की सुविधा मिल चुकी है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो डेरा प्रमुख साल 2017 से रोहतक की सुनारिया जेल में अपनी नियमित सजा भुगत रहा है। पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने उसे दो साध्वियों के साथ यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के संगीन जुर्म में दस-दस साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। इसके अतिरिक्त, अदालत ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में भी उसे दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा दी थी। इन गंभीर मामलों में सजायाफ्ता होने के बावजूद उसे शुरुआती वर्षों में बहुत कम अवधि की राहत मिली थी। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, अक्टूबर 2020 और मई 2021 में उसे केवल एक-एक दिन की आपातकालीन पैरोल दी गई थी, लेकिन बाद के समय में उसकी पैरोल की अवधि और बारंबारता में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इस बार की पैरोल अवधि के दौरान डेरा प्रमुख की गतिविधियों पर स्थानीय प्रशासन की पैनी नजर रहेगी। अदालती निर्देशों के अनुरूप, पैरोल की अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए सिरसा आश्रम के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। उसे सख्त हिदायत दी गई है कि वह पैरोल की शर्तों का पूर्णतया पालन करेगा और किसी भी विवादास्पद गतिविधि में शामिल नहीं होगा। आधिकारिक आदेश के मुताबिक, तीस दिनों की यह तय अवधि समाप्त होने के बाद आगामी चौबीस जून को गुरमीत राम रहीम सिंह को अनिवार्य रूप से रोहतक की सुनारिया जेल में वापस आकर आत्मसमर्पण करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया को लेकर न्यायिक और प्रशासनिक अमला पूरी तरह सतर्क है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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