उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में एक प्रमुख मामला सुर्खियों में है। पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को लखनऊ पुलिस ने गिरफ्तार कर देवरिया न्यायालय में पेश किया, जहां उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। यह गिरफ्तारी 1999 में देवरिया जिले में औद्योगिक प्लॉट के आवंटन के दौरान कथित धोखाधड़ी के मामले में हुई है।

सूत्रों के अनुसार, मामला 26 साल पुराना है, लेकिन सितंबर 2025 में लखनऊ पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू हुई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उस समय ठाकुर देवरिया के पुलिस अधीक्षक (SP) थे, और उन्होंने अपने पद का गलत लाभ उठाकर पत्नी के नाम पर औद्योगिक प्लॉट हासिल करने में मदद की।

इस मामले में कथित तौर पर प्लॉट संख्या B‑2 का आवंटन हुआ था, जिसे उनके अनुसार पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर हासिल किया गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में फर्जी पहचान पत्र, जालसाजी किए गए दस्तावेज और गलत पता विवरण शामिल थे, जिससे सरकारी विभागों को धोखा दिया गया।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि प्लॉट को बाद में वास्तविक नामों के साथ बेच दिया गया, जिससे सरकारी विभागों, बैंकों और अन्य हितधारकों को लंबे समय तक गुमराह किया गया। जांच टीम ने दस्तावेजों का सत्यापन किया और फर्जी पते की पुष्टि की। FIR में भारतीय दंड संहिता की धाराओं 419 (जालसाजी), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (बड़ी दस्तावेज़ जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज़ इस्तेमाल), 34 (साझा आपराधिक इरादा) और 120B (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद लखनऊ पुलिस ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कर व्यापक जांच की।

गिरफ्तारी की कार्रवाई सुबह तड़के हुई जब ठाकुर ट्रेन से दिल्ली जा रहे थे, और शाहजहांपुर स्टेशन पर उन्हें रोक कर हिरासत में लिया गया। उन्हें देवरिया लाकर कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने जांच के औपचारिक चरणों को ध्यान में रखते हुए उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा। कोर्ट में पेशी के दौरान, अमिताभ ठाकुर ने सुरक्षा की चिंता जताई और कहा कि उन्हें अपनी जान का भय है। उन्होंने अपनी ओर से कानूनी दलील दी और न्यायालय से आवश्यक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।

यह मामला न केवल पूर्व पुलिस अधिकारी के खिलाफ गंभीर आरोप को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि लंबे समय से लंबित पुराने भ्रष्टाचार के मामलों में भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। देवरिया औद्योगिक प्लॉट घोटाले की जांच अब आगे न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है, और आने वाले दिनों में इस मामले के कानूनी पहलुओं पर और अधिक स्पष्टता मिलने की संभावना है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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