दुर्घटना में पैर टूटने और एंबुलेंस न मिलने के कारण लाचार ७३ वर्षीय वृद्ध को छाता लगाकर ठेलिया पर ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ प्रसारित।

फर्रुखाबाद: उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले से सरकारी तंत्र और बैंकिंग व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। यहां के फतेहगढ़ इलाके में एक ७३ वर्षीय बुजुर्ग महिला को अपनी मासिक पेंशन प्राप्त करने के लिए शारीरिक लाचारी और गंभीर चोट की स्थिति में भी बैंक की चौखट तक आना पड़ा। दुर्घटना में पैर टूट जाने के कारण चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ इस बुजुर्ग महिला को उनका पोता एक हाथ से खींचने वाले ठेले (ठेलिया) पर लिटाकर भीषण गर्मी के बीच मुख्य सड़क से होते हुए बैंक शाखा तक लेकर पहुंचा। सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़े वीडियो और तस्वीरें प्रसारित होने के बाद स्थानीय प्रशासन और वरिष्ठ नागरिकों के लिए तय सरकारी दावों की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पीड़ित बुजुर्ग महिला की पहचान किशन प्यारी के रूप में हुई है, जिनके दिवंगत पति पूर्व में बिजली विभाग में कार्यरत थे। पति के निधन के उपरांत मिलने वाली पारिवारिक पेंशन ही उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा है। बढ़ती उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण वे पहले से ही दूसरों पर निर्भर थीं, लेकिन हाल ही में ३१ मई को हुई एक सड़क दुर्घटना ने उनकी स्थिति को और अधिक दयनीय बना दिया। इस हादसे में उनके पैर और कूल्हे की हड्डी टूट गई, जिससे उनका बिस्तर से उठ पाना भी असंभव हो गया। किशन प्यारी के पोते मनु ने बताया कि ४ जून को वह अपनी दादी की नियमित पेंशन राशि निकालने के लिए स्थानीय बैंक शाखा में गया था। मनु का आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने बिना शारीरिक उपस्थिति और अंगूठे के निशान (थम्ब इंप्रेशन) के भुगतान करने से साफ मना कर दिया।

मनु के अनुसार, उसने बैंक प्रबंधक को अपनी दादी की गंभीर चिकित्सीय स्थिति और पैर टूटने की जानकारी सविस्तार दी थी, परंतु प्रबंधन ने नियमों का हवाला देते हुए खाताधारक को स्वयं बैंक लाने की शर्त रख दी। स्थिति तब और अधिक जटिल हो गई जब पीड़ित परिवार को समय पर एंबुलेंस सेवा भी उपलब्ध नहीं हो सकी। गंभीर चोट के कारण वृद्ध महिला कार की सीट पर बैठने की स्थिति में भी नहीं थीं। अंततः कोई अन्य सुलभ साधन न मिलने पर परेशान पोते ने अपनी दादी को एक साधारण ठेले पर लिटाया और उन्हें कड़कती धूप से बचाने के लिए छाता लगाकर बैंक परिसर की ओर चल पड़ा। सड़क पर ठेले पर लेटी बुजुर्ग महिला को देखकर राहगीर स्तब्ध रह गए और कइयों ने इस प्रशासनिक उदासीनता को कैमरे में कैद कर लिया।

इस पूरे प्रकरण पर मचे हंगामे के बाद संबंधित बैंक मैनेजर प्रवेश कुमार वर्मा की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। बैंक प्रबंधक ने अपने बचाव में संवेदनहीनता के आरोपों को खारिज करते हुए एक अलग पक्ष प्रस्तुत किया है। उन्होंने कूटनीतिक वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि जब उन्हें खाताधारक के घायल होने की सूचना मिली थी, तो उन्होंने परिवार को कुछ दिन प्रतीक्षा करने की सलाह दी थी। इसके साथ ही उन्होंने यह आश्वासन भी दिया था कि यदि आवश्यकता पड़ी तो बैंक के किसी कर्मचारी को स्वयं वृद्ध महिला के घर भेजकर गृह-भुगतान (होम वेरिफिकेशन) की प्रक्रिया को पूरा करा दिया जाएगा। हालांकि, पीड़ित परिवार का दावा है कि बैंक द्वारा ऐसा कोई तत्काल विकल्प नहीं दिया गया था, जिसके कारण उन्हें यह कठोर कदम उठाने पर विवश होना पड़ा। बैंकिंग लोकपाल और प्रशासनिक नियमों के तहत अति-वरिष्ठ एवं दिव्यांग नागरिकों के लिए वित्तीय लेनदेन के विशेष नियम और शिथिलता निर्धारित हैं, परंतु धरातल पर ऐसे मामलों का सामने आना व्यवस्था के सुधारीकरण की ओर कड़ा इशारा करता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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