वाराणसी में Enforcement Directorate (ED) ने अवैध कोडीन आधारित कफ सिरप रैकेट के खिलाफ एक बड़े पैमाने पर छापेमारी की। यह रैकेट लगभग 1,000 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है और इसमें धनशोधन के आरोप भी शामिल हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य रैकेट के वित्तीय लेन-देन और अवैध गतिविधियों की गहन जांच करना है, जो Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत संचालित हो रही है।

सभी टीमों ने सुबह-सुबह वाराणसी में शुभम जायसवाल के विभिन्न परिसरों को घेर लिया। इस विशेष अभियान में 45 ED टीमें, 300 अधिकारी और 200 CRPF जवान शामिल थे। सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय प्रमाण जुटाए गए हैं, जिनसे रैकेट के पैसों के लेन-देन की परतों और कंपनियों के माध्यम से धनशोधन की पुष्टि की जा सके।

छापेमारी का दायरा केवल वाराणसी तक सीमित नहीं था। ED ने यूपी, झारखंड और गुजरात में रैकेट से जुड़े 25 स्थानों पर भी तलाशी ली। इस दौरान शुभम जायसवाल के कथित सहयोगियों और उनके वित्तीय सलाहकारों के ठिकानों पर भी दस्तावेज और रिकॉर्ड जब्त किए गए। सूत्रों ने बताया कि रैकेट ने फर्जी कंपनियों और नकली इनवॉइस के माध्यम से अवैध कारोबार को अंजाम दिया।

शुभम जायसवाल वर्तमान में फरार हैं और अधिकारियों का मानना है कि उन्होंने विदेश (संभावित तौर पर दुबई) में शरण ली है। ED और स्थानीय पुलिस इस मामले में उनके गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण के प्रयास कर रही हैं। वहीं, इस कार्रवाई से जुड़े अन्य आरोपी भी जांच के दायरे में हैं और एजेंसी उनके खिलाफ विस्तृत कानूनी कार्रवाई कर रही है।

कफ सिरप रैकेट का यह मामला पिछले कई महीनों से सुर्खियों में है। पुलिस और ED ने पहले ही इस रैकेट से जुड़ी कई मेडिकल स्टोरों और कंपनियों को निशाना बनाया था, जहां से हजारों बोतलें जब्त की गई थीं। अब इस भव्य छापेमारी के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि रैकेट केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था बल्कि एक अंतरराज्यीय नेटवर्क के तहत अवैध कारोबार कर रहा था।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस छापेमारी से न केवल अवैध कोडीन कफ सिरप की आपूर्ति पर रोक लगेगी बल्कि भविष्य में ऐसे बड़े पैमाने पर अवैध रैकेट्स को नियंत्रित करने में भी सहायता मिलेगी। ED की यह कार्रवाई इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया को गति देने और अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश देने का प्रतीक मानी जा रही है।

इस छापेमारी ने साबित कर दिया है कि कानूनी संस्थाएँ बड़े और जटिल अपराध नेटवर्क को भी चिन्हित कर उसे न्याय के कटघरे में ला सकती हैं। वाराणसी से शुरू हुआ यह अभियान अब पूरे देश में अवैध दवा रैकेट के खिलाफ सख्त कार्रवाई के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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