धौलपुर: पूर्व दस्यु जगन गुर्जर के दो भाइयों को उम्रकैद, 13 साल पुराने मर्डर में सजा
विशिष्ट न्यायालय ने संतोष हत्याकांड में लाल सिंह और पप्पू गुर्जर को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माने का फैसला सुनाया।

धौलपुर के विशिष्ट न्यायालय ने 13 साल पुराने हत्या मामले में दो भाइयों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
धौलपुर। धौलपुर के विशिष्ट न्यायालय डकैती प्रभावित क्षेत्र ने 13 साल पुराने हत्या के मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व दस्यु दिवंगत जगन गुर्जर के दो सगे भाइयों लाल सिंह गुर्जर और पप्पू गुर्जर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशिष्ट न्यायाधीश राकेश गोयल ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर दोनों आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया। न्यायालय ने दोनों पर 5-5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विशिष्ट लोक अभियोजक सतीश चंद्र शर्मा के अनुसार, हत्या की यह वारदात 22 अगस्त 2010 की रात हुई थी। लाल सिंह गुर्जर, पान सिंह गुर्जर और पप्पू गुर्जर पुत्र शिवचरण गुर्जर, निवासी विभूतिपुर, हथियारों से लैस होकर पड़ोसी गांव कुदिन्ना पहुंचे थे। वहां पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने संतोष नामक युवक को अपने साथ ले लिया। इसके बाद उसे गांव से कुछ दूरी पर ले जाकर गोली मार दी गई, जिससे उसकी हत्या हो गई।
वारदात के बाद मृतक संतोष के चाचा भूरा ने आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था। पुलिस की जांच के बाद प्रकरण न्यायालय में पहुंचा, जहां लंबे समय तक सुनवाई चली। करीब 17 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य और गवाह पेश किए। इनकी गहन पड़ताल और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने लाल सिंह गुर्जर और पप्पू गुर्जर को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही दोनों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
पूर्व दस्यु जगन गुर्जर के सगे भाई हैं दोनों दोषी
इस हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा पाने वाले लाल सिंह गुर्जर और पप्पू गुर्जर पूर्व दस्यु जगन गुर्जर के सगे भाई हैं। हाल ही में जगन गुर्जर की अजमेर स्थित हाई सिक्योरिटी जेल में गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। वहीं, जगन गुर्जर का एक अन्य भाई पप्पू गुर्जर दौसा जिला कारागार में बंद है। करीब 17 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले में न्यायालय ने हत्या के मामले में दोनों आरोपियों की दोषसिद्धि पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

Pratahkal Bureau
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