दिल्ली यूनिवर्सिटी की महिला प्रोफेसर हत्याकांड का खुलासा- मर्डर की जो वजह सामने आई उसने सबके रोंगटे खड़े कर दिए
दिल्ली यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल हत्याकांड की जांच में पुलिस ने कोलकाता से किराएदार कपल को पुश्तैनी जमीन विवाद में गिरफ्तार किया है।

दिल्ली यूनिवर्सिटी की दिवंगत असिस्टेंट प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल की दो अलग-अलग तस्वीरें साथ-साथ दिखाई दे रही हैं।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सनसनी फैलाने वाले दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) की असिस्टेंट प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल हत्याकांड की गुत्थी को दिल्ली पुलिस ने सुलझा लिया है। इस जघन्य हत्याकांड को किसी पेशेवर अपराधी ने नहीं बल्कि कोलकाता के एक कपल ने अंजाम दिया था, जिन्हें पुलिस ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस जांच में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि आरोपी कपल मृतका को अपने आर्थिक और आवासीय मंसूबों में सबसे बड़ी बाधा मानता था, जिसके चलते उन्होंने इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया। गिरफ्तार आरोपियों को कोलकाता से दिल्ली लाया जा रहा है ताकि इस हत्याकांड की सभी कड़ियों को जोड़कर अदालत के समक्ष पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें।
पुलिस अधिकारियों द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार, मृतका देबोस्मिता पॉल राजा गार्डन स्थित दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक प्रतिष्ठित कॉलेज में साल 2023 से स्थायी असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थीं। गिरफ्तार कपल कोलकाता में प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल की पुश्तैनी संपत्ति में लंबे समय से किराएदार के तौर पर रह रहा था। आरोपी उस आलीशान घर को स्थाई रूप से खरीदना चाहते थे जिसमें वे कई सालों से बसे हुए थे। चूंकि देबोस्मिता पॉल का पूरा परिवार दिल्ली में स्थाई रूप से बस चुका था और उनका दोबारा कोलकाता लौटने का कोई इरादा नहीं था, इसलिए प्रोफेसर के माता-पिता और उनके दो भाई-बहन उस मकान को बेचने के लिए पूरी तरह सहमत हो गए थे। लेकिन, असिस्टेंट प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल अपने परिवार की इस पुश्तैनी विरासत को बेचने के सख्त खिलाफ थीं और लगातार सौदे का विरोध कर रही थीं।
इसी कानूनी और पारिवारिक असहमति को आरोपियों ने अपनी डील में सबसे बड़ी रुकावट माना। जब बार-बार प्रयास करने के बाद भी महिला प्रोफेसर पुश्तैनी मकान को बेचने के लिए तैयार नहीं हुईं, तो किराएदार कपल ने उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची। आरोपी कपल कोलकाता से विशेष रूप से दिल्ली पहुंचा और मौका पाकर महिला प्रोफेसर के आवास में दाखिल हुआ। वहां दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। आरोपियों ने प्रोफेसर पर जानलेवा हमला कर दिया और वारदात को अंजाम देने के बाद वापस कोलकाता फरार हो गए।
इस वारदात की जानकारी सबसे पहले मृतका की बड़ी बहन को हुई, जो दिल्ली के मयूर विहार इलाके में अपने परिवार के साथ रहती हैं। जब देबोस्मिता पॉल ने काफी समय तक फोन का जवाब नहीं दिया, तो उनकी बड़ी बहन उनके निवास स्थान पर पहुंचीं। वहां घर का मुख्य दरवाजा बाहर से बंद पाकर उन्होंने स्थानीय निवासियों और सोसाइटी के रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) को सूचित किया। आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में जब फ्लैट का ताला तोड़ा गया, तो अंदर का दृश्य देखकर सभी स्तब्ध रह गए। अंदर प्रोफेसर देबोस्मिता पॉल का शव खून से लथपथ पड़ा हुआ था।
फॉरेंसिक टीम और जांच अधिकारियों के मुताबिक, मृतका के सिर पर किसी भारी वस्तु से वार किए जाने के गंभीर चोट के निशान मिले थे। इसके अतिरिक्त, उनकी दोनों कलाइयां कटी हुई थीं और चेहरे तथा शरीर के अन्य हिस्सों पर हाथापाई के स्पष्ट निशान मौजूद थे। यह साफ संकेत था कि अपनी जान बचाने के लिए मृतका ने हत्यारों से कड़ा संघर्ष किया था। दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत हत्या का मुकदमा दर्ज कर तकनीकी सर्विलांस और खुफिया सूचनाओं के आधार पर आरोपियों को कोलकाता से दबोच लिया। कानूनविदों के अनुसार, यह मामला सुनियोजित तरीके से की गई हत्या की श्रेणी में आता है, जिसमें आरोपियों को कड़ी से कड़ी कानूनी सजा दिलाने के लिए पुलिस चार्जशीट तैयार कर रही है। इस घटना ने महानगरीय जीवन में संपत्ति विवादों के हिंसक रूप अख्तियार करने की बढ़ती प्रवृत्ति पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है।

Lalita Rajput
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