दिल्ली पुलिस ने नाकाम की बड़ी साजिश ; ISI लिंक वाले 2 युवक गिरफ्तार, ग्रेनेड हमले की थी तैयारी
दिल्ली पुलिस ने ISI से जुड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दो युवकों राजवीर और विवेक वंजार को गिरफ्तार किया, जो दिल्ली-एनसीआर में ग्रेनेड हमले और टारगेट किलिंग की साजिश रच रहे थे। पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर शाहज़ाद भट्टी के निर्देश पर हथियार जुटाए गए थे।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा गिरफ्तार किए गए दो संदिग्ध युवक
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़ी साजिश को समय रहते विफल कर दिया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक कथित नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए दो युवकों को गिरफ्तार किया है, जो दिल्ली-एनसीआर में बड़े हमलों की तैयारी कर रहे थे। यह कार्रवाई न केवल राजधानी की सुरक्षा के लिए अहम मानी जा रही है, बल्कि देश में सक्रिय सीमापार नेटवर्क की गहराई को भी उजागर करती है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान 21 वर्षीय राजवीर और 19 वर्षीय विवेक वंजार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, ये दोनों आरोपी पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर शाहज़ाद भट्टी के संपर्क में थे, जिसे ISI का प्रॉक्सी हैंडलर माना जाता है। जांच में सामने आया है कि दोनों युवक टारगेट किलिंग, फायरिंग की घटनाओं और संभावित ग्रेनेड हमलों की योजना बना रहे थे।
इस पूरे मामले की शुरुआत 31 मार्च को हुई, जब स्पेशल सेल को खुफिया इनपुट मिला कि शाहज़ाद भट्टी और उसके सहयोगी भारत में अपने नेटवर्क के जरिए आपराधिक साजिश रच रहे हैं। इसी आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया और निगरानी शुरू की गई। लगातार तकनीकी सर्विलांस और मानव खुफिया के आधार पर पुलिस ने पहले विवेक वंजार को 16 अप्रैल को मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा इलाके से गिरफ्तार किया। उसे पांच दिन की पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें कई अहम खुलासे हुए।
विवेक से मिली जानकारी के आधार पर मुख्य आरोपी राजवीर को 18 अप्रैल को दिल्ली के सराय काले खां क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के समय राजवीर दिल्ली-एनसीआर के एक प्रमुख होटल पर फायरिंग की तैयारी कर रहा था। तलाशी के दौरान पुलिस ने एक पिस्टल, छह जिंदा कारतूस और दो मोबाइल फोन बरामद किए, जिनमें आपत्तिजनक वीडियो और वॉइस नोट्स मिले हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि राजवीर को सोशल मीडिया के जरिए ‘राणा भाई’ नामक व्यक्ति ने भर्ती किया था, जो शाहज़ाद भट्टी का करीबी सहयोगी है। बाद में राजवीर ने ही विवेक को इस नेटवर्क से जोड़ा। मार्च 2026 में भट्टी के निर्देश पर विवेक को अहमदाबाद भेजा गया था, जहां उसे हथियार लेने थे, हालांकि यह डिलीवरी सफल नहीं हो पाई। इसके बाद भट्टी ने विवेक के ठहरने के लिए 5,000 रुपये की व्यवस्था भी की थी।
आगे की साजिश के तहत 9 अप्रैल को दोनों आरोपी अमृतसर गए, जहां से उन्हें एक पिस्टल, 15-20 जिंदा कारतूस और 20,000 रुपये मिले। यह हथियार पंजाब के एसएएस नगर (मोहाली) के जीरकपुर स्थित एक क्लब पर फायरिंग के लिए दिया गया था, जिसे पहले से ही शाहज़ाद भट्टी की ओर से धमकियां मिल रही थीं। 11 अप्रैल को राजवीर ने इस क्लब पर फायरिंग की कोशिश की, लेकिन पिस्टल में तकनीकी खराबी के कारण हमला नहीं हो सका। इस दौरान विवेक ने घटना का वीडियो बनाकर भट्टी को भेजा।
पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल दो युवकों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जो सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को फंसाकर उन्हें आपराधिक गतिविधियों में शामिल कर रहा है। इस नेटवर्क का उद्देश्य भारत के प्रमुख शहरों में अस्थिरता फैलाना और डर का माहौल बनाना है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा एजेंसियां लगातार सतर्क हैं और किसी भी खतरे को समय रहते निष्क्रिय करने में सक्षम हैं। साथ ही, यह भी एक गंभीर चेतावनी है कि सीमापार संचालित नेटवर्क अब तकनीक और स्थानीय संपर्कों के जरिए अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
