नई दिल्ली: देश की राजधानी में कानून व्यवस्था और भगोड़ों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत दिल्ली पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। वर्ष दो हजार दो में पैरोल मिलने के बाद कानूनी हिरासत से फरार हुए एक शातिर अपराधी को पुलिस ने पूरे चौबीस साल बाद गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए दोषी की पहचान राकेश पटेल उर्फ पप्पी के रूप में हुई है, जिसे अदालत द्वारा हत्या के एक जघन्य मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। पुलिस की हिरासत से बचने के लिए इस अपराधी ने न केवल अपना भौगोलिक ठिकाना बदला, बल्कि प्रशासनिक दस्तावेजों में अपनी पूरी पहचान बदलकर एक आम नागरिक के रूप में समाज के बीच नया जीवन शुरू कर दिया था। दिल्ली पुलिस की विशेष टीम द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और अपराधी चाहे कितनी भी पहचान बदल ले, वह न्याय व्यवस्था से बच नहीं सकता।

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि तीन दशक से भी अधिक पुरानी है, जब वर्ष एक हजार नौ सौ नब्बे में देश की राजधानी के जहांगीरपुरी इलाके में एक वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, राकेश पटेल ने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर मामूली विवाद के चलते अपने ही एक पड़ोसी पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया था, जिसके कारण उस व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस जघन्य हत्याकांड पर कानूनी सुनवाई के बाद वर्ष एक हजार नौ सौ पचानवे में अदालत ने राकेश पटेल को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और उसे जेल भेज दिया गया। जेल में रहने के दौरान वर्ष एक हजार नौ सौ निन्यानवे में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उसकी शादी के लिए पहली बार पैरोल मंजूर की थी, जिसकी अवधि पूरी होने के बाद उसने जेल अधिकारियों के समक्ष कानूनी रूप से आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद वर्ष दो हजार दो में जब उसे अपने दूसरे बच्चे के जन्म के अवसर पर पुनः पैरोल मिली, तो उसने जेल वापस न लौटने का आपराधिक मन बना लिया और फरार हो गया।

फरार होने के बाद राकेश पटेल ने दिल्ली को पूरी तरह छोड़ दिया और अपनी पहचान छिपाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में शरण ले ली। वहां उसने कानूनी और सामाजिक रूप से खुद को मृत घोषित करने या छिपाने के लिए अपना नाम बदलकर नंदलाल वर्मा रख लिया। नए नाम और बदले हुए हुलिए के साथ उसने प्रयागराज के स्थानीय बाजार में ऑटो स्पेयर पार्ट्स का एक नया व्यवसाय स्थापित किया। व्यवसाय के सफल होने के बाद वह अपने परिवार के साथ वहां एक प्रतिष्ठित व्यापारी की तरह सामान्य और आरामदायक जीवन व्यतीत करने लगा। वर्ष दो हजार बाईस में उसने प्रयागराज में एक नए रिहायशी मकान का निर्माण भी करवा लिया ताकि वह और उसका परिवार पूरी तरह से समाज की मुख्यधारा का हिस्सा दिख सकें और दिल्ली पुलिस के खुफिया तंत्र की नजरों से दूर बने रहें।

दिल्ली पुलिस के भगोड़ों की धरपकड़ करने वाले दस्ते ने जब हाल ही में पुराने लंबित मामलों की समीक्षा शुरू की, तब राकेश पटेल का नाम पैरोल उल्लंघनकर्ताओं की सूची में शीर्ष पर पाया गया। इसके बाद पुलिस उपायुक्त के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया जिसने दोषी के पुराने जेल रिकॉर्ड, पैरोल के इतिहास, आपराधिक पृष्ठभूमि और उसके संभावित सहयोगियों के मोबाइल फोन नंबरों के तकनीकी डेटा का गहन विश्लेषण शुरू किया। खुफिया सूत्रों से पुलिस टीम को यह गुप्त सूचना मिली कि पच्चीस साल पुराना वह हत्यारा नाम बदलकर प्रयागराज में व्यापार कर रहा है। इस इनपुट के आधार पर दिल्ली पुलिस की एक टीम तुरंत उत्तर प्रदेश भेजी गई, जिसने स्थानीय स्तर पर घेराबंदी कर उसे हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान उसने शुरू में पुलिस टीम को गुमराह करने का प्रयास किया और खुद को नंदलाल वर्मा बताते हुए हत्या के मामले से किसी भी संबंध से साफ इनकार कर दिया।

राकेश पटेल की इस शातिर चालबाजी का अंत आखिरकार उसके अपने ही बेटे के कारण हुआ। जब पुलिस टीम ने संदिग्ध से अपनी वास्तविक पहचान साबित करने के लिए कोई वैध प्रशासनिक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा, तो वह कोई साक्ष्य नहीं दे सका। इसी बीच उसके बेटे ने परिवार की पहचान से जुड़े कुछ ऐसे पुराने दस्तावेज जांचकर्ताओं के समक्ष प्रस्तुत कर दिए, जिसने पुलिस के संदेह को पुख्ता कर दिया। उन दस्तावेजों के गहन और वैज्ञानिक विश्लेषण के सामने जब राकेश पटेल पूरी तरह घिर गया, तो उसने आत्मसमर्पण करते हुए अपनी वास्तविक पहचान स्वीकार कर ली और जहांगीरपुरी हत्याकांड में अपनी संलिप्तता की बात कबूल की। पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद दोषी को दिल्ली लाकर अदालत के समक्ष पेश किया, जहां से उसे पुनः न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया गया है, जो यह दर्शाता है कि समय बीतने के बाद भी वैधानिक जवाबदेही समाप्त नहीं होती।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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